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UP चुनाव में भी लोकसभा चुनाव वाली रणनीति! ऐसे क्या फॉर्मूल है, जिसपर अखिलेश यादव फिर खेलने जा रहे बड़ा दावं?

सपा का सबसे ज्यादा ध्यान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर है। साल 2012 के बाद से बसपा के कमजोर होने के बाद जो दलित वोटर छिटक गए हैं, सपा उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है। इसके अलावा, यह रणनीति दलित युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे चंद्रशेखर आजाद (आजाद समाज पार्टी) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भी बनाई गई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 13, 2026 पर 8:57 PM
UP चुनाव में भी लोकसभा चुनाव वाली रणनीति! ऐसे क्या फॉर्मूल है, जिसपर अखिलेश यादव फिर खेलने जा रहे बड़ा दावं?
UP चुनाव में भी लोकसभा चुनाव वाली रणनीति! ऐसे क्या फॉर्मूल है, जिसपर अखिलेश यादव फिर खेलने जा रहे बड़ा दावं?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली बंपर सफलता से उत्साहित समाजवादी पार्टी (SP) अब एक बड़ी सोशल इंजीनियरिंग की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव इस बार सामान्य (General) सीटों पर भी अनुसूचित जाति (SC) यानी दलित उम्मीदवारों को टिकट देने का मन बना रहे हैं।

इस रणनीति का मुख्य मकसद सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन को और मजबूत करना है, ताकि मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पारंपरिक दलित वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।

लोकसभा चुनाव के इस 'सक्सेस फॉर्मूले' को दोहराएगी सपा

सपा ने इस फॉर्मूले का पहला सफल प्रयोग 2024 के लोकसभा चुनावों में किया था, जिसके नतीजों ने सबको चौंका दिया था:

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