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रेलवे को भारी पड़ी रिजर्व कोच से यात्री के सामान की चोरी, दिल्ली के कंज्यूमर कमिशन ने सुनाया 1.45 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

दिल्ली की कंज्यूमर कमिशन ने 2014 में एक यात्री का बैग ट्रेन के रिजर्व कोच से खोने के मामले में रेलवे को 1.45 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। अपने आदेश में कमिशन ने कहा कि रेलवे यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि पैसेंजर का सामान टिकट के तहत कवर नहीं होता

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 10, 2026 पर 4:48 PM
रेलवे को भारी पड़ी रिजर्व कोच से यात्री के सामान की चोरी, दिल्ली के कंज्यूमर कमिशन ने सुनाया 1.45 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश
रेलवे यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि यात्री का सामान टिकट के तहत कवर नहीं होता।

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने उत्तर रेलवे को एक पैसेंजर को 1.45 लाख रुपये देने का आदेश दिया है, जिसका बैग ट्रेन के एक आरक्षित कोच से चोरी हो गया था। आयोग ने कहा कि रेलवे यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि यात्री का सामान टिकट के तहत कवर नहीं होता। कमीशन ने यह भी कहा कि रेलवे स्टाफ घुसपैठ को रोकने में नाकाम रहा और यात्री को FIR दर्ज कराने में ठीक से मदद नहीं की। उपभोक्ता आयोग ने 6 अक्टूबर, 2026 को उत्तर रेलवे की अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा।

7 जून 2014 का है मामला

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश के मुताबिक, अजय कुमार 7 जून, 2014 को महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे। इस दौरान दो बिना इजाजत वाले लोग उनके आरक्षित कोच में घुसे और उनका ट्रॉली बैग चुरा लिया। बैग में कथित तौर पर 1.2 लाख रुपये की ज्वेलरी, कपड़े और दूसरा सामान था। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, कुमार ने आरोप लगाया कि वह तुरंत कोच में TTE के पास गए और FIR दर्ज कराने के लिए कहा। लेकिन, FIR 23 अप्रैल, 2015 को ही दर्ज हुई। शिकायत करने वाले ने रेलवे अधिकारियों से संपर्क करना जारी रखा और बाद में पता चला कि मई 2017 में केस को अनट्रेस्ड मार्क कर दिया गया था। फिर उसने नुकसान के लिए हर्जाने की मांग करते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उत्तर रेलवे ने कहा कि सामान उसके पास बुक नहीं किया गया था और वह पैसेंजर की पर्सनल कस्टडी में था। उसने रेलवे एक्ट के सेक्शन 100 का भी हवाला दिया, जो रेलवे स्टाफ की लापरवाही साबित होने तक सामान के लिए रेलवे की जिम्मेदारी को सीमित करता है। उसने आगे कहा कि मामला चोरी से जुड़ा है और इसे क्रिमिनल लॉ के तहत निपटाया जाना चाहिए।

जिला उपभोक्ता आयोग ने 16 अप्रैल, 2024 को कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें उत्तर रेलवे को 7 सितंबर, 2017 से 9% सालाना ब्याज के साथ 1.2 लाख रुपये और हर्जाने के तौर पर 25,000 रुपये देने का निर्देश दिया। रेलवे ने उस आदेश को राज्य आयोग के सामने चुनौती दी।

आयोग ने रेलवे को जिम्मेदार क्यों ठहराया?

अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और मेंबर बिमला कुमारी की बेंच ने कहा कि जिला आयोग का रेलवे को लापरवाही और सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराना सही था। बेंच ने कहा कि मुद्दा सिर्फ यह नहीं था कि यात्री ने अपना सामान अपनी कस्टडी में रखा था या नहीं। बल्कि यह था कि रेलवे ने बिना इजाजत वाले लोगों को रिजर्व्ड कोच में घुसने से रोकने के लिए सही कदम उठाए थे या नहीं। कमीशन ने कहा, "जो यात्री रिजर्व्ड टिकट खरीदता है, वह अपनी निजी सुरक्षा और सामान की सुरक्षा और सिक्योरिटी का सही भरोसा पाने का हकदार है।"

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