"मैं लिफ्ट में फंस गया हूं... मुझे बचा लो भैया अब सांस फूल रही है... कुछ करो... ये एक 25 साल के व्यक्ति के आखिरी शब्द थे, जो शुक्रवार को दिल्ली के करोल बाग में एक सुपरमार्केट में आग लगने के बाद लिफ्ट के अंदर दम घुटने से मर गया। धुएं से भरी लिफ्ट के अंदर से मदद की गुहार लगाते हुए, UPSC की तैयारी कर रहे 25 साल के कुमार धीरेंद्र प्रताप, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी के मूल निवासी हैं और पिछले पांच सालों से दिल्ली में रह रहे थे, सांस लेने में तकलीफ के बावजूद अपने बड़े भाई को मैसेज भेजने में कामयाब रहे।
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार उन्होंने मदद के लिए फोन भी किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। महज 48 घंटे पहले ही वो फिर से UPSC की तैयारी करने राजधानी आया था, लेकिन इसके बाद करोल बाग की एक सुपरमार्केट की लिफ्ट में फंस गया था।
आग लगने के करीब आठ घंटे बाद शनिवार को बचाव दल को सुबह करीब 2:30 बजे लिफ्ट के अंदर उनका शव मिला। अपने आखिरी पलों में धीरेंद्र मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें समय रहते बचाया नहीं जा सका।
वह एक नई शुरुआत की उम्मीद लेकर वापस आया था, लेकिन इसके बजाय, वह मदद के इंतजार में हांफते हुए मर गया, जो बहुत देर से आई।
धीरेंद्र करोल बाग में किराए के मकान में रहता था। उसके बड़े भाई वीरेंद्र विक्रम ने बताया कि उसका छोटा भाई हाल ही में UPSC Prelims परीक्षा में शामिल हुआ था और घर से छुट्टी लेकर त्रासदी से ठीक एक दिन पहले महानगर लौटा था।
वीरेंद्र ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया, "मुझे शाम 6:51 बजे अपने भाई का मैसेज मिला कि वह लिफ्ट में फंस गया है और सांस नहीं ले पा रहा है। वह मुझसे कुछ करने के लिए कह रहा था, ताकि उसकी मदद की जा सके। मैंने तुरंत पुलिस को फोन किया, लेकिन घंटों तक कुछ नहीं हुआ।"
उस समय धीरेंद्र ने उन्हें मैसेज किया था, "भैया, मैं लिफ्ट में हूं। फंस गए हैं। करोल बाग मेगा मार्ट।" उनके भाई के अनुसार, उनके आखिरी मैसेज में लिखा था, "अब सांस फूल रहा। कुछ करो।"
वीरेंद्र ने रोते हुए और सांस लेने के लिए संघर्ष करते हुए कहा, "वह दो दिन पहले ही वापस आया था और फिर से घर बसाने और पढ़ाई पर वापस लौटने की कोशिश कर रहा था। उसने जो कुछ भी किया वह अपने भविष्य के लिए था और अब वह चला गया है। मुझे नहीं पता कि क्या करना है"।
वीरेंद्र ने बताया कि उनके परिवार को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि धीरेंद्र मॉल गया था। उन्होंने कहा, "वह कभी विशाल मेगा मार्ट नहीं गया। हमें नहीं पता कि वह वहां क्यों गया था। हम सभी बनारस में थे।"
उन्होंने कहा, "जरा सोचिए, अगर उसने वे मैसेज नहीं भेजे होते, तो हमें यह भी पता नहीं चलता कि वह कहां है- कि वह उस लिफ्ट में फंसा हुआ है और मर रहा है।"