Didi vs ECI: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार (4 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई में शामिल हो सकती हैं। अगर इजाजत मिली, तो ममता सुप्रीम कोर्ट में अपना केस खुद लड़ने वाली देश की पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन सकती हैं। यह सुनवाई पश्चिम बंगाल में जारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच मोस्तारी बानू और TMC सांसदों डेरेक ओ ब्रायन एवं डोला सेन द्वारा दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर एक अलग याचिका दायर की है। हालांकि, उनकी याचिका फिलहाल बुधवार की कॉज लिस्ट में शामिल नहीं है। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री बनर्जी के पास LLB की डिग्री है। इसलिए वह खुद सुनवाई में शामिल हो सकती हैं। बताया जा रहा है कि वह SIR पर अपने तर्क पेश कर सकती हैं।
19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। किसी को भी कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि SIR से प्रभावित लोगों को अपना बचाव करने का अवसर नहीं दिया जा रहा। उन्होंने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्यों में इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया।
SIR पीड़ितों के साथ दिल्ली पहुंचीं ममता
बंगाल में SIR पीड़ितों के साथ नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वे उन कई अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें इस प्रक्रिया के कारण नुकसान उठाना पड़ा। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ने आरोप लगाया, "वे एसआईआर पीड़ितों को अपना बचाव करने का मौका नहीं दे रहे हैं।"
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और अन्य नेता इनमें से कुछ लोगों को लेकर एसआईआर मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के लिए पहुंचे थे। लेकिन बनर्जी बाद में विरोध जताते हुए बैठक से बीच में ही बाहर निकल गई। ममता ने दावा किया कि उनके प्रतिनिधिमंडल का अपमान हुआ है। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया।
SIR के समय पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने मंगलवार को सवाल किया कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यह प्रक्रिया केवल विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में ही क्यों की जा रही है। बीजेपी शासित असम में क्यों नहीं, जहां चुनाव होने हैं।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले चाणक्यपुरी के 'बंग भवन' में एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित लोगों से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि वे पात्र मतदाता हैं जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। बनर्जी ने उन्हें हर तरह के सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि उनके अधिकारों, गरिमा और लोकतांत्रिक आवाज के लिए यह लड़ाई तब तक नहीं रुकेगी जब तक न्याय नहीं मिल जाता।