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TMC सांसदों का NCPI में मर्जर! क्या ऐसा करके दल बदल कानून से बच जाएंगे बागी MP? जानें- क्या कहता है नियम

TMC Crisis: दलबदल कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में कर लिया है। सिर्फ NCPI में विलय की घोषणा कर देने से दल-बदल कानून से अपने-आप बचाव नहीं हो जाता। असली कानूनी सवाल यह होगा कि क्या यह संविधान में दिए गए मर्जर के प्रावधान की शर्तें पूरी करता है या नहीं।

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jun 15, 2026 पर 10:21 AM
TMC सांसदों का NCPI में मर्जर! क्या ऐसा करके दल बदल कानून से बच जाएंगे बागी MP? जानें- क्या कहता है नियम
TMC Crisis: टीएमसी के 20 सांसदों ने NCPI में विलय किया है

TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लगभग 20 बागी लोकसभा सांसदों ने अपने गुट का विलय 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में कर लिया है। ममता बनर्जी के बागी सांसदों ने केंद्र में सत्ताधारी एनडीए (NDA) को समर्थन देने का ऐलान किया है। दलबदल कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। बता दें कि सिर्फ NCPI में विलय की घोषणा कर देने से दल-बदल कानून (Tenth Schedule) से अपने-आप बचाव नहीं हो जाता। असली कानूनी सवाल यह होगा कि क्या यह संविधान में दिए गए मर्जर (विलय) के प्रावधान की शर्तें पूरी करता है या नहीं।

हालिया घटनाक्रम के अनुसार, TMC के बागी सांसदों ने दावा किया है कि वे NCPI में विलय कर चुके हैं और लोकसभा में अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता चाहते हैं। उनका कहना है कि उनके साथ TMC के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं।

दल-बदल कानून क्या कहता है?

10वीं अनुसूची के तहत सामान्य नियम यह है कि यदि कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़ता है या दूसरी पार्टी से जुड़ता है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है। हालांकि मर्जर के मामले में एक अपवाद है, जहां दो-तिहाई विधायक/सांसद किसी विलय का समर्थन करें तो अयोग्यता से बचाव मिल सकता है।

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