कांग्रेस ने PM मोदी पर बनया था AI वीडियो, दिल्ली पुलिस के नोटिस के बाद अब मेटा ने लिया एक्शन

PM Modi AI Reels: दिल्ली पुलिस ने नोटिस में दिल्ली पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 और आईटी एक्ट की धारा 66C के संभावित उल्लंघन का हवाला दिया, जो पहचान से जुड़े साइबर अपराधों से संबंधित है। वहीं अपने बयान में मेटा ने कहा कि संबंधित कंटेंट उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं करता था, लेकिन भारतीय कानूनों का पालन करने के लिए भारत में उसकी पहुंच सीमित की गई

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 4:09 PM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस द्वारा बनाए गए AI वीडियो पर मेटा ने एक्शन लिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस द्वारा बनाए गए AI वीडियो पर मेटा ने एक्शन लिया है। दिल्ली पुलिस से कंटेंट हटाने का नोटिस मिलने के बाद मेटा ने कंग्रेस के AI वीडियो को ब्लाक कर दिया है। ये दोनों की वीडियो पीएम मोदी को लेकर AI से बनाए गए थे और अब ये भारत में एक्सेस नहीं किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम स्थानीय कानूनों के पालन के तहत उठाया गया, ताकि विवादित कंटेंट को देश के भीतर और फैलने से रोका जा सके।

टेकडाउन का मिला था नोटिस

इस टेकडाउन नोटिस की जानकारी सबसे पहले 18 दिसंबर को ल्यूमेन डेटाबेस पर सामने आई थी। यह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक प्रोजेक्ट है, जो कानूनी शिकायतों और कंटेंट हटाने से जुड़े अनुरोधों का विश्लेषण करता है। इसके बाद मनीकंट्रोल ने इस जानकारी को अलग से जांच कर पुष्टि की।


मनीकंट्रोल को मिली ये जानकारी

मेटा के एक प्रवक्ता ने मनीकंट्रोल से कहा, “हमें वैध ब्लॉकिंग ऑर्डर मिलने के बाद और मौजूदा कानूनी ज़रूरतों के तहत हमने इस कंटेंट की भारत में पहुंच पर रोक लगा दी है।” दिल्ली पुलिस के नोटिस में दिल्ली पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) और आईटी नियम, 2021 के नियम 3(1)(d) का हवाला दिया है। इसमें मेटा को साफ तौर पर कहा गया कि संबंधित कंटेंट पर कार्रवाई की जाए, वरना कंपनी को कानून के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा खोने का खतरा हो सकता है। यह कदम कानूनी नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया बताया गया है।

नोटिस में यह भी साफ किया गया था कि नियमों का पालन न करने पर मेटा के भारत में काम कर रहे कर्मचारियों पर आपराधिक ज़िम्मेदारी तय की जा सकती है। जिन पोस्ट्स पर कार्रवाई की बात कही गई, उनमें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डाली गई AI से बनाई गई रील्स शामिल थीं, जिनमें नरेंद्र मोदी को कथित तौर पर एक भारतीय कारोबारी को फायदा पहुंचाते हुए दिखाया गया था।

दिल्ली पुलिस  ने लिया एक्शन

दिल्ली पुलिस ने नोटिस में दिल्ली पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 और आईटी एक्ट की धारा 66C के संभावित उल्लंघन का हवाला दिया, जो पहचान से जुड़े साइबर अपराधों से संबंधित है। वहीं अपने बयान में मेटा ने कहा कि संबंधित कंटेंट उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं करता था, लेकिन भारतीय कानूनों का पालन करने के लिए भारत में उसकी पहुंच सीमित की गई। कंपनी के मुताबिक, कंटेंट ब्लॉक किए जाने के बाद इससे जुड़े यूज़र्स को इसकी जानकारी भी दे दी गई थी।

भारत में नहीं दिखेगा ये कंटेंट

मेटा ने इस कंटेंट को पूरी दुनिया से हटाने के बजाय इसकी रोक सिर्फ भारत तक सीमित रखी। यह मामला दिखाता है कि भारत में कानून लागू करने वाली एजेंसियां अब AI से बने राजनीतिक कंटेंट समेत ऐसे मामलों में आपराधिक कानून और इंटरमीडियरी ज़िम्मेदारी से जुड़े नियमों का ज़्यादा इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जा रही संवेदनशील सामग्री पर नियंत्रण रखा जा सके।

क्या कहते हैं नियम

भारत के डिजिटल नियमों के मुताबिक, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सरकार की ओर से जारी टेकडाउन नोटिस पर समय पर कार्रवाई नहीं करते, उन्हें आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली “सेफ हार्बर” सुरक्षा खोने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में वे यूज़र द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए खुद कानूनी रूप से ज़िम्मेदार माने जा सकते हैं, जिससे उनके लिए कानूनी जोखिम काफी बढ़ जाता है।

भारत में काम कर रही ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए अब लोकल कर्मचारियों पर आपराधिक कार्रवाई का खतरा एक बड़ा कम्प्लायंस दबाव बनता जा रहा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब AI से बने कंटेंट को लेकर नियामकीय और राजनीतिक जांच तेज़ है, खासकर चुनावी माहौल में। अधिकारियों की चिंता गलत जानकारी फैलने, किसी की पहचान का दुरुपयोग होने और मीडिया कंटेंट में हेरफेर को लेकर बढ़ रही है, जिसके चलते टेक प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी और सख्त होती जा रही है।

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