Get App

MGNREGA: मनरेगा के खर्च पर सरकार का नया नियम, क्या मजदूरी पर पड़ेगा असर?

केंद्र सरकार ने पहली बार मनरेगा के खर्च को सीमित कर दिया है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के लिए कुल सालाना बजट के 60% यानी ₹51,600 करोड़ ही खर्च किए जा सकेंगे। जानिए क्या नया नियम मजदूरी भुगतान और योजना के संचालन को प्रभावित कर सकता है।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Jun 10, 2025 पर 8:18 PM
MGNREGA: मनरेगा के खर्च पर सरकार का नया नियम, क्या मजदूरी पर पड़ेगा असर?
वित्त मंत्रालय ने मनरेगा की लंबित देनदारियों पर सवाल उठाए हैं।

MGNREGA: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत खर्च को उसकी कुल सालाना रकम के 60 फीसदी तक सीमित कर दिया है। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार है जब सरकार ने इस ग्रामीण रोजगार योजना पर खर्च की कोई सीमा तय की है।

खर्च नियंत्रण सिस्टम का हिस्सा बना मनरेगा

अब तक मनरेगा एक मांग-आधारित योजना रही है, जिसे ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) चलाता है। लेकिन, अब वित्त मंत्रालय ने इसे मंथली/क्वार्टरली एक्सपेंडिचर प्लान (MEP/QEP) के तहत लाने का फैसला किया है।

यह एक खर्च नियंत्रण प्रणाली है, जिसे मंत्रालयों की नकदी प्रवाह और उधारी पर नजर रखने के लिए 2017 में शुरू किया गया था। मनरेगा अब तक इस व्यवस्था से बाहर था।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें