मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले की एक ग्राम पंचायत ने वो कर दिखाया है, जो दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक और 'क्रिस्टोफर नोलन' जैसा डायरेक्टर भी नहीं कर पाया। इन्होंने 'टाइम ट्रेवल' का ऐसा आविष्कार किया है कि अल्बर्ट आइंस्टीन भी कब्र से बाहर आकर अपना सिर पकड़ लेंगे। ये कहानी है एक ऐसे भ्रष्टाचार, जो हुआ तो वर्तमान में, लेकिन इसकी बुनियाद भविष्य के भरोसे तैयार की गई है।
भ्रष्टाचार के मामले में समय बड़ी अजीब चीज है। यहां न कोई भूतकाल है, न भविष्य, बस 'सुविधाजनक वर्तमान' है। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडोरी जिले की शोभापुर ग्राम पंचायत ने गणित के सारे नियम फेल कर दिए हैं।
जादुई गणित: 12 महीने में 36 महीने का बिल!
कहानी कुछ ऐसी है- फरवरी 2025 में सरकार ने दयालु होकर पंचायतों का इंटरनेट खर्च ₹500 से बढ़ाकर ₹1,000 प्रति माह कर दिया। नियम के हिसाब से फरवरी 2025 से जनवरी 2026 तक होते हैं 12 महीने। यानी बिल होना चाहिए था ज्यादा से ज्यादा ₹12,000।
लेकिन शोभापुर पंचायत के सचिव और सहायक साहब तो 'भविष्यदृष्टा' निकले! उन्होंने सीधे ₹36,000 का बिल ठोक दिया। मतलब, उन्होंने 2026 ही नहीं, बल्कि 2027 और 2028 का इंटरनेट भी आज ही चला लिया है! इसे कहते हैं डिजिटल इंडिया की रफ्तार- काम हुआ नहीं, पर पैसा वसूल लिया।
दुकानदार का 'ब्लैंक चेक' वाला प्यार
NDTV के मुताबिक, जब उस दुकानदार (अमित साहू) को पकड़ा गया, जिसके नाम पर ये बिल कटे थे, तो झूठ का सारा गुब्बारा फूट गया। दुकानदार ने मासूमियत से कहा- "अरे साहब, ये तो हर महीने रिचार्ज कराने आते थे। मैंने तो इन्हें 'खाली बिल' दे दिए थे, जिन पर सिर्फ 'रिचार्ज' लिखा था। अब उसमें इन्होंने क्या जादुई आंकड़े भरे, ये तो भगवान ही जाने!" वाह! सरकारी बाबुओं का ये टैलेंट देखिए- खाली कागज को खजाना बनाने की कला इन्हें विरासत में मिली है।
याद है 'काजू-बादाम' वाली फाइलें?
वैसे मध्य प्रदेश में यह कोई पहली 'चमत्कारी' घटना नहीं है। पिछले साल शहडोल जिले की भदवाही पंचायत ने तो रिकॉर्ड ही तोड़ दिया था। वहां एक सरकारी कार्यक्रम में दावा किया गया कि ग्रामीणों ने 1 घंटे में 14 किलो सूखे मेवे (Dry Fruits) चबा लिए!
शक होने पर जांच हुई तो पता चला कि- जिस दुकान से काजू खरीदे गए, वो सीमेंट बेचती थी। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें सिर्फ दाल-खिचड़ी मिली थी।
एक ग्रामीण ने तो सिस्टम की पोल खोलते हुए कह ही दिया, "हमने तो खिचड़ी खाई थी, काजू-बादाम तो सरकारी फाइलें डकार गईं!"
फाइलें ही असली 'सुपरहीरो' हैं!
फिलहाल, SDM ने 'जांच' और 'वसूली' का भरोसा दिलाया है। लेकिन तब तक शोभापुर की पंचायत को इस बात का गर्व रहेगा कि उन्होंने 2027 का इंटरनेट 2026 में ही खत्म कर दिया।
अगर आप भी गणित में कमजोर हैं, तो टेंशन न लें। बस मध्य प्रदेश की किसी पंचायत में 'सचिव' लग जाइये, पैसा भी आएगा और भविष्य भी आपके कदमों में होगा!