MP गजब है, 2500 ईंट 1.25 लाख रुपए की! आंगनवाड़ी भवन की बाउंड्री वॉल का बिल देख कर चौंक जाएंगे आप

इसका मतलब हुआ कि एक ईंट की कीमत 50 रुपए पड़ी, जो मार्केट रेट से लगभग 10 गुना ज्यादा है। ईंट खरीद का यह बिल पेरिभारा गांव के चेतन प्रसाद कुशवाहा के नाम पर है। सप्लाई बिल में लिखा है कि यह ईंटें पतेरा टोला में आंगनवाड़ी भवन की बाउंड्री वॉल बनाने के लिए मंगाई गई थीं। बिल पर भाटिया ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव दोनों के सिग्नेचर भी मौजूद हैं

अपडेटेड Aug 30, 2025 पर 6:46 PM
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MP गजब है 2,500 ईंट 1.25 लाख रुपए की! आंगनवाड़ी भवन की बाउंड्री वॉल का बिल देख कर चौंक जाएंगे आप

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले की ग्राम पंचायतें एक बार फिर अपने हिसाब-किताब के कारनामों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला किसी बड़ी योजना का नहीं, बल्कि साधारण सी ईंट से जुड़ा हुआ है। शहडोल जिले के बुढार ब्लॉक की भाटिया ग्राम पंचायत का एक बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बिल के मुताबिक, पंचायत ने 2,500 ईंटों के लिए 1.25 लाख रुपए का पेमेंट किया गया। इसका मतलब हुआ कि एक ईंट की कीमत 50 रुपए पड़ी, जो मार्केट रेट से लगभग 10 गुना ज्यादा है।

ईंट खरीद का यह बिल पेरिभारा गांव के चेतन प्रसाद कुशवाहा के नाम पर है। सप्लाई बिल में लिखा है कि यह ईंटें पतेरा टोला में आंगनवाड़ी भवन की बाउंड्री वॉल बनाने के लिए मंगाई गई थीं। बिल पर भाटिया ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव दोनों के सिग्नेचर भी मौजूद हैं।

यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ हफ्ते पहले ही कुडरी ग्राम पंचायत चर्चा में आई थी, जब सिर्फ दो पन्नों की फोटोकॉपी के लिए 4,000 रुपए का बिल पास किया गया।


इसी तरह, जुलाई में भधवही गांव में लगे बिलों के अनुसार, जलगंगा संवर्धन अभियान (प्रचार कार्यक्रम) के सिर्फ एक घंटे में ही 14 किलो ड्राई फ्रूट, 30 किलो नमकीन और 9 किलो फल खा लिए गए।

इससे भी अजीब बात तो यह है कि जिन दुकानों से ये बिल जारी हुए, उनकी असलियत कुछ और ही निकली।

एक किराने की दुकान, जिसे काजू-बादाम सप्लाई करने वाला बताया गया, असल में वो एक छोटी सी दुकान निकली, जिसके पास न तो बिल बुक है, न GST नंबर और न ही ड्राई फ्रूट का कोई स्टॉक।

इसी तरह, घी और फलों का बिल जिस दुकान से बना, वो असल में रेत, गिट्टी और ईंटें बेचने वाली दुकान है।

जब “ड्राई फ्रूट घोटाले” की गूंज थमने लगी थी, तभी मउगंज जिले से एक और नया मामला सामने आया। यहां भी सिर्फ 40 मिनट चले जलगंगा संवर्धन अभियान पर 10 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च दिखा दिया गया।

सारे बिल एक रहस्यमयी “प्रदीप एंटरप्राइजेज” के नाम पर बनाए गए, जिनमें किराना सामान से लेकर टेंट, मिठाइयां, यहां तक कि गद्दे और चादरें भी शामिल थीं और ये सब एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान से किराए पर लिए गए बताए गए।

शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने माना है कि इन मामलों में कुछ गड़बड़ जरूर है। उन्होंने क्लस्टर लेवल के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे रोजाना 10-12 पंचायतों की जांच करें, ताकि यह पता चल सके कि ऐसे बिल लापरवाही से बने हैं या फिर जानबूझकर किए गए धोखाधड़ी का हिस्सा हैं।

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