Mumbai Digital arrest: नवी मुंबई के खारघर में रहने वाले 80 साल के एक व्यक्ति को कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में साइबर जालसाजों ने फंसाकर 4.38 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। इसके कुछ देर बाद इस मामले में एक नया ट्विस्ट सामने आया। दरअसल, स्कैमर्स ने ₹4.38 करोड़ में से ₹1.02 करोड़ उसके अकाउंट में वापस भी डाल दिए।
'हिंदुस्तान टाइम्स' के मुताबिक, नवी मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह धोखाधड़ी 18 नवंबर को शुरू हुई। पहली बार पीड़ित को एक ऐसे व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को 'साइबर डेटा प्रोटेक्शन ऑफ इंडिया' का बताया।
एक जांच अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "कॉल करने वाले ने आरोप लगाया कि पीड़ित के आधार कार्ड का इस्तेमाल करके धोखे से एक मोबाइल नंबर लिया गया है। इसके संबंध में नासिक पुलिस स्टेशन में इससे जुड़ा एक केस दर्ज किया गया है।" अधिकारी ने बताया कि पीड़ित एक इंजीनियरिंग और टेक्निकल इंस्टीट्यूट के रिटायर्ड डायरेक्टर हैं।
पहली कॉल के बाद पीड़ित को कई और धोखेबाजों के फोन आए। उन्होंने खुद को नासिक पुलिस के क्राइम ब्रांच और यहां तक कि कई जांच एजेंसियों के अधिकारी बताए। झूठा दावा किया गया कि पीड़ित के आधार डिटेल्स का इस्तेमाल एक आतंकी से जुड़े व्यक्ति ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बैंक अकाउंट खोलने में किया है।
उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। लेकिन उनकी अधिक उम्र के कारण इसे फिलहाल रोक दिया गया है। आरोपी ने WhatsApp पर फर्जी FIR, RBI के लेटर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नोटिस और सुप्रीम कोर्ट के मनगढ़ंत कम्युनिकेशन भी शेयर किए। ये सभी असली जैसे दिख रहे थे। यह सब पीड़ित को वीडियो कॉल पर जोड़ने और उसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों' से किसी को भी इस मामले के बारे में न बताने के लिए कहने के बाद किया गया।
क्या है ₹1.02 करोड़ का ट्विस्ट?
पुलिस ने बताया कि पीड़ित को सभी पैसे तथाकथित 'RBI वेरिफिकेशन अकाउंट' में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद उसने कुछ पैसे कर दिए। फिर 24 नवंबर को मामले में एक नया ट्विस्ट आया। पीड़ित के बैंक अकाउंट में ₹1.02 करोड़ वापस आ गए। इसके बाद शिकायतकर्ता से ट्रांजैक्शन की डिटेल्स शेयर करने और पैसे दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। एक सीनियर साइबर पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह रकम पीड़ित की नहीं थी।
अधिकारी ने कहा, "शिकायतकर्ता के अकाउंट में जमा किए गए ₹1.02 करोड़ दूसरे साइबर फ्रॉड पीड़ितों से निकाले गए पैसे थे। उसके अकाउंट का इस्तेमाल अवैध फंड को लेयरिंग और ट्रांसफर करने के लिए एक म्यूल अकाउंट के तौर पर किया गया था।" पीड़ित ने 26 नवंबर, 2025 और 9 जनवरी, 2026 के बीच अलग-अलग बैंक अकाउंट में कई बार पैसे ट्रांसफर किए।
उसने यह सोचकर ऐसै किया कि वह 'ऑफिशियल वेरिफिकेशन प्रोसेस' को फॉलो कर रहा है। यह फ्रॉड तब सामने आया जब नागपुर सिटी साइबर पुलिस ने साइबर क्राइम से जुड़े संदिग्ध ट्रांजैक्शन को फ्लैग करने के बाद पीड़ित के बैंक ऑफ महाराष्ट्र अकाउंट को फ्रीज कर दिया। मामले का खुलासा होने के बाद पीड़ित ने साइबर अधिकारियों से संपर्क किया।
फिर 10 जनवरी को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उसने साइबर पुलिस स्टेशन में अपना बयान दर्ज कराया। पुलिस ने कंफर्म किया कि पीड़ित का कुल फाइनेंशियल नुकसान ₹4,38,62,210 का हुआ है।
पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पहचान छिपाने, धोखाधड़ी, जालसाजी और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत अपराधों के लिए मामला दर्ज किया है। धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए बैंक अकाउंट, फोन नंबर और IP एड्रेस का पता लगाने के लिए जांच चल रही है।