मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 97 हत्या के मामलों की पत्रावलियां वापस लिए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने NDPS Act के एक पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए इन फाइलों को वापस लिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। रवि कुमार दिवाकर मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं। उनका जन्म जुलाई 1980 में हुआ था। पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने B.Com और LLM की पढ़ाई की है। इसके बाद साल 2009 में उन्होंने अतिरिक्त सिविल जज के तौर पर उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कदम रखा। तब से अब तक उन्होंने न्यायिक सेवा में करीब 17 साल पूरे किए हैं। इस दौरान उनकी तैनाती उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रही और उन्होंने सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। फिलहाल वह मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनात हैं।
