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₹12 लाख का सोलर पैनल और सिर्फ 2 घंटे का बैकअप ! नोएडा के इस कंज्यूमर को अब इंट्रेस्ट समेत वापस मिलेंगे पूरे पैसे

सोलर सिस्टम लगवाने के बाद कृष्णा यादव को शुरुआत से ही सही फायदा नहीं मिला। उन्होंने इसके लिए लोन लिया था, लेकिन सिस्टम सिर्फ करीब 2 घंटे का बैकअप देता था और कुछ समय बाद पूरी तरह बंद हो गया। मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां 15 सितंबर को आयोग ने फर्म के खिलाफ एकतरफा फैसला सुनाते हुए ब्याज समेत पूरी रकम वापस करने का आदेश दिया। पैसे वापस मिलने के बाद फर्म अपना सोलर सिस्टम वापस ले सकती है।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 18, 2026 पर 11:04 AM
₹12 लाख का सोलर पैनल और सिर्फ 2 घंटे का बैकअप ! नोएडा के इस कंज्यूमर को अब इंट्रेस्ट समेत वापस मिलेंगे पूरे पैसे

बिजली का बिल कम करने के लिए सोलर सिस्टम लगवाना नोएडा के कृष्ण यादव को काफी महंगा पड़ गया। करीब 12 लाख रुपये का सोलर सिस्टम लगवाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इससे बिजली की जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाएगी, लेकिन सिस्टम शुरू से ही ठीक से काम नहीं कर पाया। शुरुआत में करीब दो घंटे का बैकअप मिला और बाद में यह समय घटकर करीब एक घंटे रह गया। बार-बार शिकायत करने और इंजीनियर से जांच कराने के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई। आखिरकार कृष्ण यादव ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां सुनवाई के बाद आयोग ने कंपनी को पूरी रकम ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया।

करीब 12 लाख रुपये में खरीदा था सोलर सिस्टम

नोएडा के सेक्टर-91 स्थित ग्राम होशियारपुर निवासी कृष्ण यादव ने एआरएस इंटरप्राइजेज से स्मार्टन सोलर सिस्टम 15 केवीए खरीदने और लगवाने का अनुबंध किया था। कंपनी की ओर से दिए गए कोटेशन के आधार पर उन्होंने चॉइस फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड से 7 लाख 80 हजार रुपये का लोन कराया। इसके अलावा उन्होंने 4 लाख 20 हजार 600 रुपये नकद कंपनी को दिए। इस तरह सोलर सिस्टम के लिए कुल 12 लाख 600 रुपये का भुगतान किया गया। सिस्टम लगवाने के बाद जब इसका इस्तेमाल शुरू हुआ तो यह उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाया।

शुरू से ही नहीं मिला सही बैकअप

कृष्ण यादव के मुताबिक, घर पर सिस्टम लगने के बाद से ही इसमें परेशानी आने लगी थी। सिस्टम करीब दो घंटे का बैकअप देने के बाद बंद हो जाता था। उन्होंने इस समस्या की जानकारी कंपनी को दी, जिसके बाद कंपनी ने सर्विस इंजीनियर मनीष कुमार को जांच के लिए भेजा। इंजीनियर ने सिस्टम की गुणवत्ता में कमी की बात कही और उसे ठीक करने की कोशिश की। मरम्मत के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई और सिस्टम करीब एक घंटे का ही बैकअप दे पाया। इसके बाद वह फिर बंद हो गया। इससे साफ था कि केवल मरम्मत करने से भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा था।

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