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हम सभी को मिलकर अगले 10 सालों में देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना होगा: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘‘यह संदेश दिया जा रहा था कि भारत की धीमी विकास दर किसी न किसी तरह हिंदू सभ्यता का ही परिणाम है। और जो लोग आज हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देते हैं, उन्हें उस समय इस पर कोई आपत्ति नहीं थी। यह संज्ञा किताबों और शोध पत्रों का हिस्सा बन गई

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 06, 2025 पर 11:07 PM
हम सभी को मिलकर अगले 10 सालों में देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना होगा: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है, भारत एक अलग ही लीग में नजर आ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अगले 10 सालों में देश को गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त करने का शनिवार को आग्रह किया और कई वर्षों की सुस्त आर्थिक विकास को हिंदू विकास दर बताकर पूरी सभ्यता को बदनाम करने की कोशिश करने वाले ‘‘तथाकथित बुद्धिजीवियों’’ पर निशाना साधा। मोदी ने यहां ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट’ में कहा कि जब दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है, भारत आत्मविश्वास से लबरेज है और वैश्विक मंदी के दौर में विकास की कहानी लिख रहा है।

उन्होंने कहा कि कोई भी देश आत्मविश्वास के बिना आगे नहीं बढ़ सकता है और आज हर क्षेत्र औपनिवेशिक मानसिकता को त्याग रहा है तथा गर्व के साथ नयी उपलब्धियों की ओर अग्रसर है।

मोदी ने कहा, ‘‘यह औपनिवेशिक मानसिकता विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक बड़ी रूकावट बन गई है। इसीलिए आज का भारत इस मानसिकता से मुक्त होने के लिए काम कर रहा है।’’

उन्होंने कहा कि इस औपनिवेशिक मानसिकता का असर ऐसा है कि आज भी, जब दुनिया के कई लोग भारत को वैश्विक विकास का इंजन बताते हैं, बहुत कम लोग इस उपलब्धि के बारे में गर्व से बात करते हैं।

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