
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को कहा कि वह निजी बातचीत के लिए फोन और इंटरनेट का बहुत कम इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत करने के ऐसे दूसरे तरीके भी होते हैं, जिनके बारे में आम लोगों को जानकारी नहीं होती। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग कार्यक्रम में उनसे पूछा गया कि मोबाइल और इंटरनेट के इस दौर में वह कैसे बातचीत करते हैं। इस पर अजीत डोभाल ने कहा कि उन्हें नहीं पता लोगों को कैसे यह मालूम हुआ कि वह फोन का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने साफ किया कि यह सच है कि वह निजी कामों के अलावा फोन या इंटरनेट का बहुत कम उपयोग करते हैं और इनके बिना भी अपना काम आसानी से कर लेते हैं।
भारत यंग लीडर्स डायलॉग में कही ये बात
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 3,000 युवा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि. कभी-कभी, जब विदेश में किसी से संपर्क करना जरूरी होता है, तो वह फोन या इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि बातचीत के कुछ ऐसे तरीके भी होते हैं, जिनके बारे में आम आदमी को पता नहीं होता।
'हर क्षेत्र में भारत को बनना होगा मजबूत'
अजीत डोभाल ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में कहा कि भारत को सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, समाज और विकास के हर क्षेत्र में खुद को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करना जरूरी है ताकि देश अपने ऊपर हुए हमलों और गुलामी के दर्दनाक इतिहास का सही मायनों में जवाब दे सके। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आज के युवा खुशकिस्मत हैं कि उनका जन्म आज़ाद भारत में हुआ। उन्होंने बताया कि उनका खुद का जन्म गुलाम भारत में हुआ था। डोभाल ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने आज़ादी के लिए संघर्ष किया और असहनीय कठिनाइयों का सामना किया।
उन्होंने कहा कि भगत सिंह जैसे वीरों को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने पूरी ज़िंदगी संघर्ष किया और महात्मा गांधी को देश को आज़ादी दिलाने के लिए सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा। डोभाल ने युवाओं से इन बलिदानों को याद रखते हुए देश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। अजीत डोभाल ने कहा कि भले ही “बदला” शब्द सुनने में सकारात्मक न लगे, लेकिन यह एक मजबूत प्रेरक ताकत बन सकता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने इतिहास में झेली गई पीड़ाओं का जवाब देना है और भारत को उस स्तर तक ले जाना है, जहां वह सिर्फ सीमा सुरक्षा में ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और हर क्षेत्र में फिर से महान बने।
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