FASTag की जगह नई तकनीक...1 मई से पूरे देश में बदल जाएगा टोल कलेक्शन सिस्टम? सरकार ने दी ये जानकारी

Toll Tax new System: सरकार ने यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि यह नई सैटेलाइट-आधारित टोल प्रणाली मौजूदा फास्टैग सिस्टम की जगह लेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 1 मई 2025 से देशभर में सैटेलाइट-आधारित टोलिंग शुरू हो जाएगी। लेकिन मंत्रालय या NHAI ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है

अपडेटेड Apr 18, 2025 पर 3:44 PM
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Toll Tax new System: देश में जल्द ही टोल कलेक्शन का पूरा सिस्टम बदलने वाला है?

Toll Tax new System: देश में जल्द ही टोल कलेक्शन का पूरा सिस्टम बदलने वाला है। आने वाले दिनों में जब आप हाईवे या एक्सप्रेसवे पर गुजरेंगे तो आपको टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। देश में जल्द ही GPS आधारित नया टोल कलेक्शन सिस्टम शुरू होगा। जानकारी के मुताबिक, GPS आधारित नया टोल कलेक्शन सिस्टम 1 मई 2025 से लागू होने की बात सामने आई थी, हांलकि अब सरकार ने साफ किया है कि 1 मई 2025 से पूरे देश में सैटेलाइट आधारित टोल वसूली प्रणाली शुरू करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

सरकार ने दी ये जानकारी

सरकार ने यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि यह नई सैटेलाइट-आधारित टोल प्रणाली मौजूदा फास्टैग सिस्टम की जगह लेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय  ने अपने बयान में कहा, "कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 1 मई 2025 से देशभर में सैटेलाइट-आधारित टोलिंग शुरू हो जाएगी। लेकिन मंत्रालय या NHAI ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है।" मंत्रालय ने यह भी बताया कि टोल प्लाजा पर वाहनों की रुकावट रहित आवाजाही और यात्रा समय को कम करने के लिए 'ANPR-फास्टैग आधारित बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम' को कुछ चुनिंदा टोल प्लाजा पर लागू किया जाएगा।


'फास्टैग सिस्टम' होगा पुराना?

नई उन्नत टोलिंग प्रणाली में 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन' (ANPR) तकनीक को शामिल किया जाएगा। यह तकनीक वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़कर उनकी पहचान करेगी। साथ ही, मौजूदा 'फास्टैग सिस्टम' भी इस्तेमाल होगा, जो रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) के ज़रिए टोल शुल्क काटता है। इस प्रणाली के तहत, वाहन टोल प्लाजा पर बिना रुके निकल सकेंगे। हाई-टेक ANPR कैमरे और फास्टैग रीडर वाहनों की पहचान कर उन्हें टोल चार्ज करेंगे।

अगर कोई वाहन नियमों का पालन नहीं करता, तो उसे ई-नोटिस भेजा जाएगा। तय समय में भुगतान न करने पर फास्टैग को निलंबित किया जा सकता है और वाहन पर अन्य जुर्माना भी लगाया जा सकता है। NHAI ने 'एएनपीआर-फास्टैग आधारित बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम' को लागू करने के लिए टोल प्लाजा पर इसे लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसके लिए बोलियाँ मंगाई गई हैं। यह सिस्टम फिलहाल कुछ चुने हुए टोल प्लाजा पर ही लगाया जाएगा। मंत्रालय ने बताया कि इस नई व्यवस्था का फैसला इसके प्रदर्शन, काम की गुणवत्ता और लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर देशभर में लागू करने को लेकर लिया जाएगा।

हाल के वर्षों में देश में टोल वसूली में काफी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में टोल से 64,809.86 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो पिछले साल की तुलना में 35% ज्यादा है। वहीं, 2019-20 में यह आंकड़ा 27,503 करोड़ रुपये था।

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