CJI की टिप्पणी के बाद NCERT का यू-टर्न, 8वीं की किताब से 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' का हिस्सा हटाने का किया ऐलान; बिक्री पर रोक के साथ मांगी माफी

NCERT Controversy: बुधवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। CJI ने कहा कि वह इस मामले को खुद संज्ञान में लेंगे और किसी को भी न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थान को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने इसे 'सोची-समझी साजिश' बताया

अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 9:55 AM
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NCERT ने एक आधिकारिक बयान जारी कर संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए बिना शर्त माफी मांगी है

NCERT: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह कदम किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' के संदर्भ को लेकर मचे बवाल और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद उठाया गया है। NCERT ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसे 'निर्णय की चूक' बताया और संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए बिना शर्त माफी मांगी है।

'संस्थान को बदनाम करने की इजाजत नहीं'

बुधवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। CJI ने कहा कि वह इस मामले को खुद संज्ञान में लेंगे और किसी को भी न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थान को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने इसे 'सोची-समझी साजिश' बताते हुए कहा कि कानून अपना काम करेगा। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद शिक्षा मंत्रालय और NCERT तुरंत हरकत में आ गए।


NCERT की सफाई- 'अनजाने में हुई गलती'

विवाद बढ़ता देख NCERT ने बुधवार शाम को स्पष्टीकरण जारी किया। दिल्ली स्थित NCERT कैंपस में जो किताबें सोमवार तक बिक रही थीं, उनकी बिक्री 'कड़े आदेश' के साथ रोक दी गई है। परिषद ने कहा कि अध्याय 4 'समाज में न्यायपालिका की भूमिका' में कुछ अनुपयुक्त सामग्री अनजाने में शामिल हो गई थी। NCERT ने जोर देकर कहा कि वे न्यायपालिका को संविधान के संरक्षक के रूप में सर्वोच्च सम्मान देते हैं। परिषद ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य छात्रों में संवैधानिक साक्षरता बढ़ाना था, न कि किसी संवैधानिक संस्था के अधिकार को कम करना।

शिक्षा मंत्रालय ने भी किया हस्तक्षेप

स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। मंत्रालय ने अगले आदेश तक किताब के वितरण को पूरी तरह रोकने का निर्देश दिया है, जिसका पालन कर लिया गया है। बता दें कि नई किताब में भ्रष्टाचार के अलावा मुकदमों के भारी बोझ और जजों की कमी को न्यायपालिका की चुनौती बताया गया था। अब इन हिस्सों की समीक्षा की जाएगी और सुधार के बाद ही नई प्रतियां बाजार में लाई जाएंगी।

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