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यूपी में अब हिंसक प्रदर्शन में शामिल हुए तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी! योगी सरकार ने सख्त किए कैरेक्टर सर्टिफिकेट के नियम

New rules for protests in UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए चुने गए उम्मीदवारों के कैरेक्टर सर्टिफिकेट (character verification) के नियमों को सख्त कर दिया है। इसके तहत मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से हिंसक गतिविधियों में शामिल होने वाले युवाओं को नियुक्ति के लिए अयोग्य माना जाएगा

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Oct 29, 2026 पर 1:28 PM
यूपी में अब हिंसक प्रदर्शन में शामिल हुए तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी! योगी सरकार ने सख्त किए कैरेक्टर सर्टिफिकेट के नियम
New rules for protests in UP: यूपी में 'रिजीम चेंज' के लिए हिंसा करने वालों को अब सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी

New rules for protests in UP: उत्तर प्रदेश में अब सरकार बदलने के लिए अगर युवा सड़क पर उतरकर हिंसा करते हैं, तो उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की सरकारी नौकरियों में चयनित उम्मीदवारों के लिए कैरेक्टर वेरिफिकेशन (character verification) के नियमों को कड़ा कर दिया है। इस नए फैसले के तहत "मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से हिंसक गतिविधियों" में शामिल रहने वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा। यह कदम हाल ही में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान "सत्ता परिवर्तन" (regime change) की मांग को लेकर दिल्ली में हुए प्रदर्शनों को लेकर जारी विवाद के बीच उठाया गया है।

विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस फैसले की आलोचना की है। नियुक्ति और कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की तरफ से जारी ये गाइडलाइंस इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद आए हैं। ये नियम यूपी सरकार के विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होंगे।

गाइडलाइंस में क्या है?

संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी ऐसे संगठन की सदस्यता, जो हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था को बदलने की वकालत करता हो उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने का आधार बन सकती है। कैरेक्टर सर्टिफिकेट से ठीक पहले के तीन सालों के दौरान (उम्मीदवार के 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद) ऐसी गतिविधियों में शामिल होने को व्यक्ति के लगातार ऐसे कार्यों से जुड़े होने का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, अगर इस बात के ठोस सबूत मिलते हैं कि उम्मीदवार के आचरण में बदलाव आया है, तो इस धारणा पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

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