Nipah Virus: निपाह कर देगा तबाह! चपेट में आए मरीजों में से आधों की हो जाती है मौत! भारत में मिले केस, WHO भी अलर्ट
Nipah Virus: निपाह वायरस भारत में एक दुर्लभ लेकिन बहुत खतरनाक बीमारी है। यह मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ (फ्लाइंग फॉक्स) से फैलता है और कभी-कभी इंसान से इंसान में भी। इसकी मौत की दर 40% से 75% तक हो सकती है। भारत में पहली बार 2001 में दिखा था, और अब तक कई बार इसके मामले सामने आ चुके हैं
Nipah Virus: निपाह कर देगा तबाह! चपेट में आए मरीजों में से आधों की हो जाती है मौत! (PHOTO-AI)
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने गुरुवार को भारत में एक दुर्लभ वायरस के दो मामलों की रिपोर्ट दी। दिसंबर 2025 के बाद से भारत में निपाह वायरस के केवल दो मामले सामने आने के बाद, WHO ने शुक्रवार को कहा कि देश से वायरस फैलने का खतरा कम है और यात्रा या व्यापार प्रतिबंधों की कोई जरूरत नहीं है। WHO का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हांगकांग, थाईलैंड, ताइवान, मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम और नेपाल में निपाह वायरस के मामले सामने आने के बाद Covid-19 जैसी स्वास्थ्य जांच व्यवस्थाएं फिर से लागू की जा रही हैं।
निपाह वायरस भारत में एक दुर्लभ लेकिन बहुत खतरनाक बीमारी है। यह मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ (फ्लाइंग फॉक्स) से फैलता है और कभी-कभी इंसान से इंसान में भी। इसकी मौत की दर 40% से 75% तक हो सकती है। भारत में पहली बार 2001 में दिखा था, और अब तक कई बार इसके मामले सामने आ चुके हैं।
निपाह नाम का यह वायरस जिन लोगों को संक्रमित करता है, उनमें से आधे से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है, जो बताता है कि ये कितना घातक है। इस वायरस का नाम मलेशिया के उस गांव के नाम पर रखा गया है, जहां इसका पहला मामला सामने आया था।
निपाह वायरस उसी वायरस फैमली से जुड़ा है, जिससे खसरा (मीजल्स) होता है। हालांकि, निपाह खसरे जितना तेजी से फैलता नहीं है, लेकिन यह उससे कहीं ज्यादा खतरनाक और जानलेवा है।
निपाह वायरस कैसे फैलता है?
निपाह एक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार, यह वायरस सबसे ज्यादा संक्रमित सूअर या चमगादड़ के सीधे संपर्क से फैलता है।
इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति ऐसे फल या फलों से बने प्रोडक्ट खाता है, जो संक्रमित फल खाने वाले चमगादड़ों के मूत्र या लार से दूषित हों, तो उससे भी निपाह फैल सकता है। उदाहरण के लिए, कच्चा खजूर का रस (डेट पाम जूस) पीने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कुछ मामलों में यह वायरस इंसान से इंसान में भी फैल सकता है, खासकर संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब रहने या उसकी देखभाल करने के दौरान।
निपाह वायरस के लक्षण क्या हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह वायरस से संक्रमित होने के 4 से 14 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं। बिना लक्षण वाले मामले बहुत कम होते हैं। शुरुआती लक्षण आमतौर पर सामान्य होते हैं और फ्लू जैसे लगते हैं।
शुरुआती लक्षण (फ्लू जैसे):
तेज बुखार
सिरदर्द
गले में खराश
मांसपेशियों में दर्द
थकान
खांसी
सांस लेने में तकलीफ
गंभीर लक्षण (जो जल्दी आ सकते हैं):
भ्रम (दिमागी उलझन)
उनींदापन
दौरा पड़ना
दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस)
कोमा
कुछ लोगों में फेफड़ों की समस्या (निमोनिया)
लगभग दो-तिहाई मरीजों में बीमारी तेजी से गंभीर हो जाती है और 5 से 7 दिन के भीतर कोमा की स्थिति भी आ सकती है। कुछ मामलों में मरीजों को सांस से जुड़ी समस्याएं भी होती हैं, जैसे खांसी और छाती के एक्स-रे में असामान्य बदलाव।
ज्यादातर मरीजों में दिमाग के चारों ओर मौजूद लिक्विड (ब्रेन फ्लूइड) में बदलाव देखे जाते हैं, जो दूसरे वायरल दिमागी संक्रमणों में भी पाए जाते हैं। दिमाग की जांच (ब्रेन इमेजिंग) में टिश्यू के नष्ट होने के संकेत मिल सकते हैं। वहीं, दिमाग की वेव्स से बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाया जाता है।
गंभीर मामलों में क्या होता है?
गंभीर स्थिति में निपाह वायरस दिमाग के उन हिस्सों पर हमला कर सकता है, जो आंखों की गति, दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर जैसे जीवन के जरूरी कामों को नियंत्रित करते हैं। इससे स्थायी नुकसान हो सकता है।
जो लोग इस संक्रमण से बच जाते हैं, उनमें अक्सर लगातार थकान रहती है और नर्वस सिस्टम के काम करने के तरीके में बदलाव आ सकता है। ये समस्याएं कई बार सालों तक बनी रहती हैं।
निपाह की जांच कैसे होती है?
निपाह वायरस की पहचान आमतौर पर खून के सैंपल से की जाती है। इसमें खास तरह के प्रोटीन की जांच की जाती है, जिससे वायरस की मौजूदगी और मात्रा का पता चलता है।
निपाह का इलाज कैसे होता है?
फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई खास वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज को सहायक इलाज (सपोर्टिव केयर) देते हैं। जिन मरीजों में दिमाग से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, उन्हें सांस लेने में मदद (जैसे वेंटिलेटर) की जरूरत पड़ सकती है।
रिबाविरिन नाम की एक दवा, जिसे आमतौर पर क्रॉनिक हेपेटाइटिस-C के इलाज में दूसरी दवाओं के साथ इस्तेमाल किया जाता है, निपाह वायरस में कुछ हद तक फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, इसके नतीजे साफ नहीं हैं और हर मामले में असर एक-सा नहीं पाया गया है।
इसलिए डॉक्टरों का मुख्य जोर बचाव पर रहता है। इसमें जानवरों से इंसानों में वायरस फैलने के खतरे को कम करना और संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने पर कड़ी संक्रमण-नियंत्रण सावधानियां अपनाना शामिल है। यानी निपाह के मामले में सावधानी और रोकथाम ही सबसे बड़ा हथियार है।
भारत में निपाह वायरस के मामले कब-कब और कहां सामने आए?
2001: सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल – 66 मामले, 45 मौतें (मौत की दर ~68%)। अस्पताल में इंसान से इंसान में फैला वायरस हुआ।
2007: नदिया जिला, पश्चिम बंगाल – 5 मामले, सभी 5 की मौत (मौत की दर 100%)।
2018: कोझीकोड और मलप्पुरम, केरल – 19 मामले, 17 मौतें (मौत की दर 89%)। सबसे बड़ा आउटब्रेक केरल में।
2019: एर्नाकुलम, केरल – 1 मामला, कोई मौत नहीं और व्यक्ति ठीक हो गया।
2025-2026 (हालिया): पश्चिम बंगाल – दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक 2 पुष्ट मामले (दोनों 25 साल की नर्सें, एक ही अस्पताल में काम करती थीं)। एक मरीज ठीक हो रहा है, दूसरा गंभीर हालत में। 196 संपर्कों की जांच हुई – सभी नेगेटिव निकले।
दुनिया और कहां मिले निपाह वायरस के केस?
निपाह वायरस के प्रकोप एशिया के कुछ हिस्सों में लगभग हर साल देखे जाते हैं। यह बीमारी सबसे ज्यादा बांग्लादेश में पाई गई है। इसके अलावा भारत, मलेशिया, फिलीपींस और सिंगापुर में भी मामले सामने आए हैं। बांग्लादेश में मामलों की संख्या ज्यादा होने की वजह यह है कि वहां निपाह फैलाने वाले फल खाने वाले बड़े चमगादड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
यह वायरस आमतौर पर दिसंबर से मई के बीच ज्यादा फैलता है। यह समय चमगादड़ों के प्रजनन और खजूर के रस (डेट पाम सैप) निकालने का होता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
निपाह वायरस चीन, कंबोडिया, थाईलैंड, मेडागास्कर और घाना में पाए जाने वाले चमगादड़ों में भी मिला है। हालांकि, अमेरिका में आज तक निपाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
यह बीमारी बहुत ही दुर्लभ है। साल 2024 तक दुनिया भर में इसके करीब 754 मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि असल संख्या इससे ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई मामले रिपोर्ट ही नहीं हो पाते।