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काम के बाद नो ऑफिस कॉल और मेल! लोकसभा में पेश हुआ राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025

बिल के अनुसार, अगर कोई कंपनी या संस्था नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस पर अपने कर्मचारियों के कुल वेतन का 1% जुर्माना लगाया जा सकता है। यह बिल हर कर्मचारी को यह अधिकार देता है कि वे काम से जुड़े कॉल, ईमेल या दूसरे डिजिटल जरिए से काम के समय के बाद पूरी तरह ‘डिसकनेक्ट’ रह सकें।

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 06, 2025 पर 5:41 PM
काम के बाद नो ऑफिस कॉल और मेल! लोकसभा में पेश हुआ राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025
काम के बाद नो ऑफिस कॉल और मेल! लोकसभा में पेश हुआ राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025

NCP की सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में “राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025” पेश किया है। इस बिल का उद्देश्य देश के कर्मचारियों और कामगारों के लिए बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस सुनिश्चित करना है। यह एक प्राइवेट मेंबर बिल है, जिसे शुक्रवार को पेश किया गया। ध्यान देने वाली बात है कि लोकसभा और राज्यसभा- दोनों के सदस्य ऐसे मुद्दों पर प्राइवेट बिल पेश कर सकते हैं, जिन पर वे मानते हैं कि सरकार को कानून बनाना चाहिए।

xसुले ने X पर लिखा कि “यह बिल लोगों की जिंदगी की गुणवत्ता सुधारने और आज की डिजिटल संस्कृति से पैदा होने वाली थकान (बर्नआउट) को कम करके एक स्वस्थ वर्क-लाइफ बैलेंस बनाने का लक्ष्य रखता है।”

उन्होंने तर्क दिया कि डिजिटल और कम्युनिकेशन टेक्नॉलजी ने काम को लचीला तो बनाया है, लेकिन इससे दफ़्तर और निजी जीवन की सीमाएं धुंधली भी हो गई हैं।

बिल में कहा गया है कि कई अध्ययनों के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी से हमेशा उपलब्ध रहने की उम्मीद की जाती है, तो उसे नींद की कमी, तनाव और मानसिक थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

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