Noida Protest Update: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में फैक्टरी मजदूरों के प्रदर्शन के बाद अब ऊंची बिल्डिंगों में लोगों के घरों में काम करने वाली मेड्स यानी घरेलू सहायिकाओं ने भी अधिक सैलरी की मांग करते हुए सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है। खबरों के मुताबिक, इस कदम से बड़े-बड़े रिहायशी इलाकों में रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि उन्हें मासिक सैलरी के रूप में केवल 2,500 से 3,000 रुपये तक मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें पूरे महीने में मात्र दो दिन की छुट्टी दी जाती है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी। मजदूरों का आंदोलन शांत होने के बाद मंगलवार (14 अप्रैल) को नोएडा के सेक्टर 121 में सैकड़ों घरेलू सहायिकाओं ने एक प्रीमियम हाउसिंग सोसाइटी के बाहर प्रदर्शन किया।
उन्होंने वेतन बढ़ाने और महीने में चार दिन की छुट्टी समेत कई मांगें रखीं। प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर पत्थरबाजी हुई। कुछ वाहन क्षतिग्रस्त हुए। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन में शामिल एक महिला शिवकुमारी ने कहा, "महंगाई के इस दौर में ढाई-तीन हजार रुपये में पूरे महीने घर चलाना बेहद मुश्किल है। गैस, राशन और बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है।"
पुलिस उपायुक्त (जोन द्वितीय) शैव्या गोयल ने बताया कि क्लियो काउंटी, गढ़ी चौखंडी, सेक्टर-121 और सेक्टर-70 क्षेत्रों में घरेलू सहायिकाओं द्वारा वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रही।
महिलाओं ने बताया कि उनका विरोध प्रदर्शन अचानक से शुरू हुआ। मंगलवार को सुबह 7 बजे से कुछ महिलाएं रिहायशी सोसाइटी के बाहर जमा हुईं। प्रदर्शन में शामिल हुईं कामगारों में से एक अर्चना ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "हम सोशल मीडिया पर कल के विरोध प्रदर्शन के जो वीडियो देखे थे, उनके बारे में बात कर रहे थे... उसके बाद हमें एहसास हुआ कि पिछले कुछ सालों में हमारा वेतन भी नहीं बढ़ा है।"
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि सरकार फैक्टरी मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन की सीमा तय करती है। रेखा ने पूछा, "यह देखकर हमें हैरानी हुई कि सरकार ने 700 रुपये प्रतिदिन की सीमा तय की है। हम उस नियम के दायरे में क्यों नहीं आते?" उन्होंने कहा कि वह जहां काम करती हैं वह लोग तीन से चार रुपये कमाते हैं, तो हमारी सैलरी क्यों नहीं बढ़ा सकते?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, महिलाओं के प्रदर्शन से बड़े-बड़े रिहायशी इलाकों में रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई है। नौकरानियों और रसोइयों ने सोसायटियों में घुसने से साफ मना कर दिया है। उन्होंने कहा है कि जब तक उनकी अधिक सैलरी और काम के तय घंटों की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
नोएडा की नौकरानियों की ताजा मांगों में हर महीने मिलने वाले वेतन में तुरंत बढ़ोतरी और हर महीने या हफ़्ते में मिलने वाली छुट्टियों के लिए एक बेहतर व्यवस्था शामिल है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक घरेलू कामगार बोली, "प्राइवेट स्कूलों की फीस, राशन, LPG, सब कुछ महंगा होता जा रहा है। लेकिन हमारा वेतन जस का तस है। मेरे बच्चे भी प्राइवेट स्कूल में क्यों नहीं पढ़ सकते?"
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि वे काम पर लौटने से पहले कितने समय तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे? तो घरेलू कामगारों ने पलटकर जवाब दिया, "जब तक हमारा वेतन नहीं बढ़ाया जाता, तब तक हम काम पर वापस नहीं लौटेंगे।" घरेलू कामगारों ने नियमित और व्यवस्थित साप्ताहिक छुट्टियों की भी मांग की है। विरोध प्रदर्शन कर रही कुछ नौकरानियों ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें महीने में केवल दो छुट्टियां मिलती हैं।