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एनआर नारायणमूर्ति ने कहा- युवाओं को AI से डरने की जरूरत नहीं, इसे सीखना होगा

इंफोसिस के को-फाउंडर एनआर नारायणमूर्ति ने कहा कि प्रोडक्टिविटी के लिए जेनरेटिव एआई के इस्तेमाल का मेरा अनुभव यह बताता है कि इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से स्मार्ट माइंड को अच्छी क्वालिटी और प्रोडक्टिविटी मिलेगी। इसलिए युवाओं को एआई से चिंतित होने की जरूरत नहीं है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 26, 2026 पर 2:33 PM
एनआर नारायणमूर्ति ने कहा- युवाओं को AI से डरने की जरूरत नहीं, इसे सीखना होगा
नारायणमूर्ति ने कहा कि कामकाज में मदद के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आर्टिफिशियिल इंटेलिजेंस (एआई) का असर न सिर्फ आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है बल्कि दूसरे सेक्टर में भी इसके चलते बदलाव दिख सकता है। सबसे ज्यादा डर नौकरियों पर इसके असर को लेकर है। माना जा रहा है कि ऑफिस में बैठकर किए जाने वाले कई काम अब एआई टूल्स की मदद से पूरे होंगे। इन कामों के लिए इनसान की जरूरत नहीं पड़ेगी। मनीकंट्रोल ने इस बारे में जानने के लिए इंफोसिस के को-फाउंडर नआर नारायणमूर्ति से बातचीत की। उनसे एआई के असर के बारे में पूछा।

एआई के इस्तेमाल से अच्छी क्वालिटी और प्रोडक्टिविटी मिलेगी

नारायणमूर्ति ने कहा, "प्रोडक्टिविटी के लिए जेनरेटिव एआई के इस्तेमाल का मेरा अनुभव यह बताता है कि इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से स्मार्ट माइंड को अच्छी क्वालिटी और प्रोडक्टिविटी मिलेगी। इसलिए युवाओं को इससे चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्हें सिर्फ इस टेक्नोलॉजी को जानने और सीखने की जरूरत है। वे कामकाज में मदद के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। वे अपने फायदे के लिए इस टेक्नोलॉजी को जल्द सीखकर नए आइडियाज और डिसिप्लिन जल्द लर्न कर सकते हैं। इसका मतलब है कि स्मार्ट और मेहनती लोगों के लिए दुनिया खत्म होने नहीं जा रही। "

एआई से जुड़ी स्किल सीखने पर फोकस बढ़ाना होगा

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