बिहार में चाय बेचने वाले के घर से 1,05,49,850 रुपए कैश और सोना जब्त, साइबर फ्रॉड करने वाले दो भाई गिरफ्तार

Cyber Fraud: साइबर DSP अवंतिका दिलीप कुमार ने बताया कि जब्त किए गए सामान में 85 ATM कार्ड, 75 बैंक पासबुक, 28 चेकबुक, आधार कार्ड, दो लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और एक लक्जरी कार भी शामिल थी

अपडेटेड Oct 21, 2025 पर 10:08 AM
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DSP ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि गिरोह धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कई बैंक खातों में ट्रांसफर करता था और बाद में उसे नकदी में बदल लेता था

Bihar News: बिहार पुलिस ने गोपालगंज में एक चाय विक्रेता के घर पर छापा मारकर ₹1.05 करोड़ से अधिक की नकदी और भारी मात्रा में आभूषण जब्त किए हैं। पुलिस ने दो भाइयों को गिरफ्तार किया है, जिन पर एक अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क चलाने का आरोप है। खुफिया जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने शुक्रवार, 17 अक्टूबर देर रात अमाईठी खुर्द गांव में छापेमारी की । जांच के दौरान पुलिस ने जो सामान बरामद किया, वह चौंकाने वाला था।

चाय विक्रेता के घर से ₹1,05,49,850 नकद, 344 ग्राम सोना, और 1.75 किलोग्राम चांदी जब्त की गई। साइबर DSP अवंतिका दिलीप कुमार ने बताया कि जब्त किए गए सामान में 85 ATM कार्ड, 75 बैंक पासबुक, 28 चेकबुक, आधार कार्ड, दो लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और एक लक्जरी कार भी शामिल थी। DSP ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि गिरोह धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कई बैंक खातों में ट्रांसफर करता था और बाद में उसे नकदी में बदल लेता था।

दुबई से चलता था किंगपिन का नेटवर्क


पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अभिषेक कुमार पहले एक छोटी सी चाय की दुकान चलाता था। बाद में वह कथित तौर पर साइबर अपराध रैकेट में शामिल हो गया और दुबई चला गया, जहां से वह धोखाधड़ी के संचालन का प्रबंधन करता था। वहीं उसका भाई आदित्य कुमार भारत में लेनदेन और लॉजिस्टिक्स का काम संभालता था।

पुलिस ने पाया कि जब्त की गई अधिकांश पासबुक बेंगलुरु से जारी की गई थीं, जिससे जांच का दायरा अन्य राज्यों तक बढ़ा दिया गया है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या ये खाते किसी नेशनल लेवल के साइबर नेटवर्क से जुड़े थे।

गिरफ्तार किए गए दोनों भाइयों से दो दिनों से पूछताछ की जा रही है, और पुलिस जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा का विश्लेषण कर रही है ताकि नेटवर्क के अधिक सदस्यों की पहचान की जा सके। इस जांच में आयकर विभाग और आतंकवाद विरोधी दस्ता (ATS) भी शामिल हो गया है ताकि पैसों के स्रोत और संगठित साइबर अपराध से संभावित लिंक का पता लगाया जा सके।

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