अगर किसान को अपनी खून-पसीने वाली मेहनत से उगाई गई फसल सड़क पर डंप करनी पड़े तो इससे बुरी स्थिति क्या होगी। हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में ऐसा ही कुछ देखने को मिला जिसने हर किसी को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। महाराष्ट्र के नंदगांव एपीएमसी (Nandgaon APMC) के सामने किसानों ने विरोध स्वरूप ट्रैक्टर भरकर प्याज सड़क पर फेंक दिया। किसानों का आरोप है कि उन्हें अपनी फसल का जो दाम मिल रहा है वह खाद, बीज और मजदूरी तो दूर, मंडी तक लाने के परिवहन खर्च को भी पूरा नहीं कर पा रहा है।
भारतीय कृषि मंडियों में इन दिनों प्याज के किसानों की आंखों से आंसू निकल रहे हैं। एक तरफ जहां रिटेल बाजार में प्याज की कीमतें स्थिर नजर आती हैं, वहीं दूसरी ओर मंडियों में प्याज के दाम इस कदर गिर गए हैं कि किसान अपनी उपज को सड़कों पर या कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) के गेट पर डंप करने को मजबूर हैं। महाराष्ट्र के नासिक से लेकर मध्य प्रदेश की मंडियों तक, प्याज 1 रुपये से 4 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है। हालात इतने खराब हैं कि किसानों को खेत से मंडी तक का ट्रैक्टर का भाड़ा भी अपनी जेब से भरना पड़ रहा है। इस संकट के पीछे न केवल घरेलू कारण हैं, बल्कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तनाव की परछाईं का असर भी साफ नजर आ रहा है।
कौड़ियों के भाव बिक रहा प्याज: 100 से 400 रुपये प्रति क्विंटल
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, नासिक की कई मंडियों में औसत दर्जे के प्याज की कीमत 800 से 1000 प्रति क्विंटल (8 से 10 रुपये प्रति किलो) रह गई है। वहीं, छोटी वैरायटी के प्याज का भाव गिरकर 1 से 4 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि कम से कम 2000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिले, तभी लागत वसूल हो सकती है। ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने सरकार से तत्काल दखल देने और आर्थिक सहायता की मांग की है।
क्या पश्चिम एशिया के युद्ध ने बिगाड़ा खेल?
प्याज की कीमतों में इस भारी गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण खाड़ी देशों के साथ व्यापार में आई रुकावट को भी समझा जा रहा है। भारत के प्याज का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों में निर्यात होता है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण शिपमेंट की रफ्तार स्लो हो गई है। निर्यात रुकने से जो प्याज विदेशों में जाना था, वह अब घरेलू मंडियों में ही डंप हो रहा है। इससे आपूर्ति इतनी अधिक हो गई है कि कीमतों में भारी गिरावट आ गई है।
सिर्फ वैश्विक संघर्ष ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य घरेलू कारण भी इस संकट को हवा दे रहे हैं। इस सीजन में रबी प्याज की पैदावार बहुत अच्छी हुई है। इससे मंडियों में आवक उम्मीद से कहीं ज्यादा है। बढ़ते तापमान के कारण गोदामों में रखा प्याज खराब होने लगा है। नुकसान से बचने के लिए किसान आनन-फानन में प्याज बेच रहे हैं। इससे बाजार और गिर गया है। मजदूरी और डीजल की कीमतों ने खेती और परिवहन को महंगा कर दिया है।
नासिक की सड़कों पर उतरे किसानों ने प्रशासन और व्यापारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। किसानों की स्पष्ट मांग है कि केंद्र और राज्य सरकार प्याज के लिए कम से कम 2000 प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करें। जिन किसानों ने भारी घाटे में प्याज बेचा है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए।