West Bengal Election: पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले फेज में 92 फीसदी से ज्यादा वोटिंग, पूर्व CEC SY कुरैशी ने समझाया इसका गणित

West Bengal Election: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं। आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 92% से अधिक मतदान हुआ।

अपडेटेड Apr 24, 2026 पर 8:12 AM
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पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले फेज में 92 फीसदी से ज्यादा वोटिंग

West Bengal Election: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं। आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 92% से अधिक मतदान हुआ। तमिलनाडु में ECI ने 84.69% मतदान दर्ज किया। आयोग ने इसे दोनों राज्यों में स्वतंत्रता के बाद से सबसे अधिक मतदान बताया है।

आयोग द्वारा जारी आंकड़ों में 1951 से अब तक लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोटिंग प्रतिशत में हुए बदलाव को दिखाया गया है। हालांकि, आयोग ने अभी तक दोनों राज्यों के उन चुनावों में किसी भी विधानसभा क्षेत्र (कॉन्टिटुएंसी) के हिसाब से मतदान का पूरा विवरण साझा नहीं किया है।

ऐप पर अपडेट नहीं हैं सही आंकड़े


आयोग की प्रेस रिलीज नागरिकों को ECI के मोबाइल ऐप की ओर निर्देशित करती है, जहां “जिलेवार और विधानसभा क्षेत्र (AC) के अनुसार अनुमानित मतदान प्रतिशत” देखा जा सकता है। लेकिन ऐप पर भी अभी तक सही आंकड़े यानी हर विधानसभा सीट पर कितने लोगों ने वोट डाला, यह शेयर नहीं किया गया है।

ऐप पर ऐसे कोई मतदाता संख्या के आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं, जिनसे क्षेत्रीय या जनसांख्यिकीय  अंतर और मतदान के पैटर्न का विश्लेषण किया जा सके।

ECI ने क्या कहा?

आयोग की प्रेस रिलीज में कहा गया है: "चुनाव आयोग के नए निर्देशों के अनुसार, पीठासीन अधिकारियों ने मतदान समाप्त होने पर मतदान केंद्र छोड़ने से पहले ECINET पर मतदान प्रतिशत को अपडेट किया, जिसके परिणामस्वरूप मतदान रुझानों को अपडेट करने में न्यूनतम देरी हुई।"

आयोग ने प्रेस रिलीज में आगे कहा कि केवल उच्च मतदान प्रतिशत से ही मतदाताओं की वास्तविक स्थिति का सटीक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। पश्चिम बंगाल के मामले में यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों का विशेष गहन संशोधन (SIR) किया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अयोग्य मतदाताओं को हटाना था, और यह तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी की गई।

हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाएं और नियम बंगाल में अन्य राज्यों की तुलना में काफी अलग थे। कम से कम 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जबकि 27 लाख मतदाताओं ने अपना नाम दोबारा दर्ज कराने का प्रयास किया, जिनमें से अधिकांश असफल रहे।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने किया ट्विट

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी ने X पर कुछ पोस्टों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में देखी गई उच्च मतदान प्रतिशत के कारण को समझाने का प्रयास किया है। बंगाल में लगभग 92% मतदान के आंकड़े पर उन्होंने कहा- "लोग 92% के रिकॉर्ड मतदान पर तरह-तरह के अनुमान लगा रहे हैं। अगर 70 लाख (7 मिलियन) मतदाताओं के नाम सूची से नहीं हटाए गए होते, तो यह आंकड़ा लगभग 83% ही रहता।"

चुनाव आयोग वोटर्स का सही आंकड़ा बताए

कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग को दोनों राज्यों में हुए चुनावों में मतदान करने वाले लोगों की सही-सही संख्या बतानी चाहिए। उन्होंने खुलासा किया कि आयोग के पास मतदान की गिनती करने की एक सरल प्रक्रिया है। उनके ट्वीट से पता चलता है कि यह प्रक्रिया चुनाव प्रशासन में नियमित रूप से अपनाई जाती है, हालांकि यह बात शायद ज्यादातर लोगों को पता न हो।

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