Padma Row in Maharashtra: भगत सिंह कोश्यारी को 'पद्म भूषण' मिलने पर महाराष्ट्र में बवाल, विपक्ष क्यों नाखुश है?

Padma Row in Maharashtra: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके भगत सिंह कोश्यारी को 25 जनवरी को 'पद्म भूषण' अवॉर्ड देने की घोषणा हुई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत और कांग्रेस नेताओं ने केंद्र के फैसले की निंदा करते हुए कोश्यारी पर तीखा हमला किया है। आखिर क्यों विपक्ष कोश्यारी का विरोध कर रहा है

अपडेटेड Jan 26, 2026 पर 7:28 PM
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Padma Row in Maharashtra: उत्तराखंड के CM और महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके भगत सिंह कोश्यारी को 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया है

Padma Row in Maharashtra: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार की तरफ से महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को 'पद्म भूषण' से सम्मानित करने के फैसले की निंदा की हैं। राउत ने आरोप लगाया कि कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार को गिराकर राज्य में लोकतंत्र और संविधान की हत्या की थी। केंद्र सरकार ने रविवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की। उन्होंने 2019 से 2023 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार और एकनाथ शिंदे सहित 'महायुति' सरकार को भी कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित करने के फैसले की निंदा करनी चाहिए। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और समाज सुधारकों महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले का अपमान किया था।

शिवसेना (UBT) नेता ने कहा, "उन्होंने (कोश्यारी ने) लोकतंत्र और संविधान की हत्या की और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को गिरा दिया।" उन्होंने दावा किया कि कोश्यारी उद्धव ठाकरे की बहुमत वाली सरकार को गिराकर राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार लाना चाहते थे।


पूर्व राज्यपाल को छत्रपति शिवाजी महाराज को पुराने जमाने का आदर्श बताने वाली टिप्पणी पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। कोश्यारी का राज्यपाल के तौर पर सितंबर 2019 से फरवरी 2023 के बीच का कार्यकाल उद्धव ठाकरे की महा विकास आघाडी (MVA) सरकार के साथ टकराव के कारण सुर्खियों में रहा था।

कांग्रेस ने भी किया विरोध

कांग्रेस नेताओं हर्षवर्धन सपकाल और वर्षा गायकवाड़ ने महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित करने के फैसले की सोमवार को कड़ी आलोचना की। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख सपकाल ने कहा कि कोश्यारी ने संवैधानिक पद का अपमान किया। साथ ही राज्य की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई।

कांग्रेस कार्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद सपकाल ने कहा कि उन्होंने पुणे के एक सामाजिक संगठन से पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि इसे कोश्यारी द्वारा प्रदान किया जाना था। कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का महाराष्ट्र के महान नेताओं और संवैधानिक हस्तियों का अपमान करने का लंबा इतिहास रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कोश्यारी ने पहले भी छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, "ऐसे व्यक्ति को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करना महाराष्ट्र का अपमान है।"

कौन हैं कोश्यारी?

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके भगत सिंह कोश्यारी को पब्लिक अफेयर्स के क्षेत्र में उनकी सेवाओं, टीचर और पत्रकार के तौर पर सफल करियर के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के रहने वाले कोश्यारी ने 1964 में अल्मोड़ा यूनिवर्सिटी से इंग्लिश में मास्टर डिग्री पूरी की। इस दौरान, उन्होंने अपने कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन के जनरल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया।

कोश्यारी ने 1979 से 1982, 1982 से 1985 और 1988 से 1991 तक कुमाऊं यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल में भी प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के एटा में राजा का रामपुर के राजा इंटर कॉलेज में लेक्चरर के तौर पर भी काम किया था। इसके अलावा एक पत्रकार के तौर पर कोश्यारी को 1975 में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से 'पर्वत पीयूष' नाम का एक साप्ताहिक अखबार शुरू करने और उसे मैनेज करने का श्रेय दिया जाता है।

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