Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के एक गांव में रविवार (4 मई) को इम्तियाज अहमद माग्रे नाम के एक 23 वर्षीय युवक का शव बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों से बचने के लिए उसने नदी में कूदकर अपनी जान दे दी। युवक पर पहलगाम में हमला करने वाले आतंकियों को शरण देने और उनकी मदद करने का आरोप था। माग्रे लश्कर के लिए काम करने वाला एक ओवर ग्राउंड वर्कर था। उसने कथित तौर पर पहलगाम में हमला करने वाले आतंकवादियों को भोजन और रहने का ठिकाना मुहैया कराया था। आरोप है कि युवक को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पूछताछ के लिए सुरक्षाबलों ने हिरासत में लिया था।
यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले के बाद शुरू की गई थी। उस घातक हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। माग्रे का शव बरामद होने के कुछ घंटों बाद सामने आए ड्रोन फुटेज में एक युवक को अदबल नाले में कूदते और बहते हुए देखा गया। पुलिस ने दावा किया कि माग्रे ने आतंकवादियों का सहयोग करने की बात कबूल की थी। वह सुरक्षाबलों को जंगल क्षेत्र में एक ठिकाने पर ले रहा था। इस दौरान उसने भागने की कोशिश की थी।
इस बीच, जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री सकीना इट्टू ने माग्रे की मौत से जुड़े मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए दावा किया कि पुलिस रिकॉर्ड में मृतक के खिलाफ कुछ भी नहीं है। इट्टू ने कहा, "माग्रे की मौत की न्यायिक जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। पहलगाम हमला बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण था। हम सभी इससे दुखी हैं। हालांकि, डर का माहौल बना हुआ है। मैं उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अनुरोध करती हूं कि गृह विभाग को निर्देश दिए जाएं कि निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए और उन्हें नुकसान न पहुंचाया जाए।"
वहीं, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने X पर एक पोस्ट में कहा, "कुलगाम में नाले से एक और शव बरामद हुआ है, जिसे लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सुरक्षाबलों ने इम्तियाज माग्रे को दो दिन पहले ही पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था और अब उसका शव रहस्यमय तरीके से नाले में मिला है।"
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहलगाम में आतंकवादी हमला कश्मीर में शांति को पटरी से उतारने, पर्यटन को बाधित करने और देशभर में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का सुनियोजित प्रयास था। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के लोकसभा सदस्य आगा रूहुल्लाह मेहदी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वह माग्रे के शव की बरामदगी से बहुत चिंतित हैं।
मेहदी ने कहा, "विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार, माग्रे को कुछ दिन पहले सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया था और आज उसे मृत अवस्था में उसके परिवार को सौंप दिया गया। पहलगाम हमले के बाद कश्मीरियों की मौत को नुकसान की भरपाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। मनमाने ढंग से हिरासत में लेना, हिरासत में हत्या करना और यातना देना हर लोकतांत्रिक और कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन है।"