Pakistan news: जेब में अरबों डॉलर और हाथ में मिसाइल, जानिए IMF से मदद मिलते ही पाकिस्तान ने कैसे बदला रंग

पाकिस्तान को जब कभी आईएमएफ और ऐसी संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलती है तो उसकी सेना का कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है। वह ज्यादा ताकत से भारत के खिलाफ प्रत्यक्ष और परोक्ष हमलों में लग जाता है। 9 मई की रात IMF से मदद मिलते ही उसने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया

अपडेटेड May 10, 2025 पर 4:09 PM
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अमेरिका और ब्रिटेन में भारत के सीनियर राजनयिक अंतरराष्ट्रीय मीडिया को यह बताते रहे हैं कि पाकिस्तान किस तरह आतंकी संगठनों को मदद उपलब्ध कराता रहा है। इसके सबूत भी पेश किए गए हैं।

आईएमएफ से आर्थिक मदद की डील पर हस्ताक्षर की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि पाकिस्तान ने अपना असली चेहरा दिखा दिया। 9-10 मई की दरमियानी रात उसने इंडिया पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार उसने बैलेस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। पहले के दो-तीन दिनों में उसने हमलों के लिए ज्यादातर ड्रोन का इस्तेमाल किया था। इंडिया में सरकार के सीनियर अधिकारी ने कहा कि यह संयोग नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान को जब कभी आईएमएफ और ऐसी संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलती है तो उसकी सेना का कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है। वह ज्यादा ताकत से भारत के खिलाफ प्रत्यक्ष और परोक्ष हमलों में लग जाता है।

भारत दुनिया को अपनी चिंता से अवगत कराता रहा है

अमेरिका और ब्रिटेन में भारत के सीनियर राजनयिक अंतरराष्ट्रीय मीडिया को यह बताते रहे हैं कि पाकिस्तान किस तरह आतंकी संगठनों को मदद उपलब्ध कराता रहा है। इसके सबूत भी पेश किए गए हैं। ऐसे आतंकवादियों के साथ पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के फोटो पेश किए जाते रहे हैं जिनके नाम दुनिया के सबसे बड़े आतंकियों में शामिल हैं। ऐसे में IMF की तरफ से पाकिस्तान को आर्थिक मदद के प्रस्ताव को मंजूरी चौंकाती है।


IMF की मदद से बढ़ा है पाकिस्तान का हौसला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "मुझे नहीं पता कि अतंरराष्ट्रीय समुदाय की इस बारे में क्या सोच है कि जब उपमहाद्वीप में इतनी ज्यादा ज्यादा टेंशन की स्थिति है तब पाकिस्तान को आईएमएफ की मदद से यह टेंशन कैसे कम होगा।" आईएमएफ इसलिए पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है कि इससे वहां आर्थिक स्थिरिता बहाल होगी और पाकिस्तान विकास के रास्ते पर चलेगा।

IMF की शर्तें सरकार के लिए होती है सेना के लिए नहीं

आईएमएफ जब किसी देश की अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने के लिए मदद देता है तो वह इसके साथ कड़ी शर्तें तय करता है। इसमें टैक्स रिफॉर्म्स, सब्सिडी में कमी और एनर्जी की कीमतों में इजाफा शामिल होता है। लेकिन, पाकिस्तान के मामले में स्थिति अलग दिखती है। एक तरफ आईएमएफ पाकिस्तान की सरकार को अपनी शर्तों को मानने के लिए राजी करता है तो दूसरी तरफ सेना पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। वह अपने एजेंडे पर काम करती है। पाकिस्तान सरकार के बजट डॉक्युमेंट से यह साफ है कि पाकिस्तान डिफेंस पर अपना खर्च 18 फीसदी तक बढ़ा सकता है। उसे अपने लोगों के हेल्थ, एजुकेशन और दूसरी बुनियादी जरूरतों की कोई फिक्र नहीं रही है।

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इंडिया ने IMF की मदद रोकने की पूरी कोशिश की थी

इंडिया कई वैश्विक मंचों पर इस बारे में अपनी चिंता से अगवत करा चुका है। 9 मई को पाकिस्तान को आर्थिक मदद के लिए हुई आईएमएफ की बैठक से पहले इंडिया ने इस बात की पूरी कोशिश की थी कि आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला देश आर्थिक मदद के पैसे का दुरूपयोग कर सकता है। आईएमएफ के आर्थिक मदद के प्रस्ताव को मंजूर करते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि आईएमएफ की मदद को रोकने वालों की कोशिशें नाकाम हो गई हैं।

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