भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की। उन्होंने ईरान में जरूरी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर हो रहे हमलों की निंदा की और कहा कि इससे पूरे इलाके की शांति और स्थिरता को खतरा है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बताया कि उन्होंने ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह त्योहार पूरे पश्चिम एशिया में शांति और तरक्की लेकर आए।
उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री रास्तों की सुरक्षा बहुत जरूरी है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रास्ते की। यह दुनिया के तेल और गैस का लगभग 20% सप्लाई करता है, इसलिए इसका बंद होना पूरी दुनिया को प्रभावित करता है।
पीएम मोदी ने कहा कि जरूरी ढांचे पर हमले न सिर्फ इलाके की शांति बिगाड़ते हैं, बल्कि दुनिया भर की सप्लाई चेन पर भी असर डालते हैं। उन्होंने यह भी सराहा कि ईरान वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा में मदद कर रहा है।
यह पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से दूसरी बातचीत थी। इससे पहले 12 मार्च को भी उन्होंने बात की थी और बढ़ते तनाव और आम लोगों की मौत पर चिंता जताई थी।
पीएम मोदी ने साफ कहा कि युद्ध के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सामान और ऊर्जा की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहनी चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि भारत शांति और स्थिरता चाहता है और सभी देशों को बातचीत और कूटनीति के जरिए समस्या सुलझानी चाहिए।
पश्चिम एशिया पर भारत का रुख
भारत लगातार कह रहा है कि इस संघर्ष का हल बातचीत और समझौते से ही निकलेगा।
युद्ध शुरू होने के बाद से पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान, इजरायल, यूएई, सऊदी अरब, ओमान और कतर जैसे देशों के नेताओं से बात की है।
भारत ने एक तरफ ईरान के हमलों की आलोचना की है, तो दूसरी तरफ ईरान से बातचीत भी बढ़ाई है ताकि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और गैस की सप्लाई बनी रहे, जो हाल के हमलों के बाद काफी प्रभावित हुई है।