Vande Mataram Debate: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में 'वन्दे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ऐतिहासिक चर्चा की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में 'वन्दे मातरम्' की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे संकट के समय देश में ऊर्जा भरने वाला और प्रेरित करने वाला 'जयघोष' बताया। उन्होंने बेहद आसान शब्दों में समझाया कि यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए क्यों इतना खास है।
मुश्किल समय में भी हिम्मत देने वाला नारा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'वन्दे मातरम्' सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि ऐसा शक्तिशाली नारा था जिसने हर मुश्किल समय में देश के लोगों में हिम्मत और जोश भरा। उन्होंने याद दिलाया कि जब यह गीत 100 साल का हुआ था, तब देश में इमरजेंसी लगी थी और लोगों को जेल भेजा जा रहा था। इस मुश्किल दौर में भी इस गीत ने लोगों को हौसला दिया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि हम उस 'वन्दे मातरम्' को याद कर रहे हैं, जिसने आजादी के आंदोलन में ऊर्जा भरी और लोगों को देश के लिए बलिदान का रास्ता दिखाया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस गीत को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में 1857 के विद्रोह के बाद लिखा था। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र जी ने इस गीत को लिखकर अंग्रेजों को सीधे चुनौती दी थी। यह गीत सिर्फ आजादी के लिए नहीं था, बल्कि यह हमारी पुरानी सभ्यता और संस्कृति की झलक दिखाता है। उन्होंने समझाया, 'जब हम वन्दे मातरम् कहते हैं, तो यह हमें वेदों के समय की याद दिलाता है। इसका मतलब है कि यह धरती मेरी मां है, और मैं इस धरती का बेटा हूं।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत को लिखकर ब्रिटिशर्स को सीधी चुनौती दी थी। उन्होंने गीत के ऐतिहासिक महत्व को समझाते हुए कहा कि जब 'वन्दे मातरम्' 50 साल का हुआ तब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, और जब यह 100 साल का हुआ, तब देश दुर्भाग्य से आपातकाल के शिकंजे में था, जहां देशभक्तों को जेल में डाला जा रहा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'वन्दे मातरम्' केवल आजादी के लिए एक मंत्र नहीं था, बल्कि यह हमें 'वेद काल' की याद दिलाता है और कहता है कि यह भूमि मेरी मां है। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जा, प्रेरणा दी, और बलिदान तथा तपस्या का मार्ग दिखाया, यह एहसास कराया कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन के एक टुकड़े के लिए नहीं थी, और इसी गीत ने 1947 में हमें आजादी दिलाई।