पीएम मोदी की नॉर्वे विजिट से भारत को क्या मिला? ये 12 बड़े समझौते हुए उनके फायदे जान लीजिए

India Norway Partnership: पीएम की यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' कर लिया है। इसके तहत दोनों देशों के बीच 12 महत्वपूर्ण समझौते हुए। ये नई पार्टनरशिप भारत के क्लाइमेट, स्पेस, डिजिटल और मैरीटाइम सेक्टर्स को नई रफ्तार देंगे

अपडेटेड May 19, 2026 पर 8:47 AM
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पीएम मोदी ने ओस्लो में द्विपक्षीय वार्ताओं के साथ-साथ तीसरे 'भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में भी हिस्सा लिया

India, Norway 12 Agreements: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे की आधिकारिक यात्रा भारत के लिए बेहद ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही है। इस यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' में बदल दिया है। दोनों देशों के बीच कुल 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी है, जो भारत के क्लाइमेट, स्पेस, डिजिटल और मैरीटाइम सेक्टर्स को नई रफ्तार देंगे।

यह प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा का चौथा पड़ाव था, जहां उन्होंने ओस्लो में द्विपक्षीय वार्ताओं के साथ-साथ तीसरे 'भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में भी हिस्सा लिया।

आइए आसान भाषा में विस्तार से जानते हैं कि पीएम मोदी की इस नॉर्वे विजिट से भारत को कौन से 12 बड़े फायदे हुए हैं:


1. ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप

दोनों देशों ने अपने संबंधों को आगे बढ़ाते हुए एक 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' की शुरुआत की है। इसके तहत नॉर्वे की उन्नत टेक्नोलॉजी और भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल करके क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन, सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण संरक्षण पर मिलकर काम किया जाएगा।

2. इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में नॉर्वे शामिल

समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नॉर्वे आधिकारिक तौर पर 'इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव' (IPOI) में शामिल हो गया है। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, खुले और समृद्ध व्यापारिक मार्गों को बढ़ावा मिलेगा।

3. 'नॉर-शिपिंग 2027' में भारत का जलवा

भारत साल 2027 में होने वाले प्रतिष्ठित 'नॉर-शिपिंग' (Nor-Shipping 2027) इवेंट में अपना समर्पित 'इंडिया पवेलियन' स्थापित करेगा। इससे भारत को शिपबिल्डिंग, ग्रीन शिपिंग टेक्नोलॉजी और आधुनिक पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (ब्लू इकोनॉमी) के क्षेत्र में बड़ा वैश्विक निवेश मिलेगा।

4. अंतरिक्ष के क्षेत्र में ऐतिहासिक समझौता

अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और खोज के लिए दोनों देशों की स्पेस एजेंसियों के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। इसके जरिए इसरो (ISRO) और नॉर्वेजियन स्पेस एजेंसी के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ेगा और स्पेस सेक्टर में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

5. डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप की शुरुआत

'डिजिटल इंडिया' मिशन को रफ्तार देने के लिए 'भारत-नॉर्वे डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप' लॉन्च की गई है। इसके तहत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और ओपन डिजिटल इकोसिस्टम पर काम होगा, जिससे न सिर्फ भारत बल्कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को भी फायदा पहुंचेगा।

6. हेल्थ सेक्टर में मजबूत सहयोग

हेल्थकेयर सेक्टर में दोनों देशों के बीच रिसर्च और आधुनिक मेडिकल तकनीकों को साझा करने के लिए एक 'जॉइंट वर्किंग ग्रुप' बनाया जाएगा। इससे भारत के मेडिकल संस्थानों को नॉर्वे की रिसर्च का सीधा लाभ मिलेगा।

7. टनल निर्माण और हाई-वे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तकनीक

पहाड़ी और कठिन रास्तों पर सुरक्षित टनल निर्माण, ढलान स्थिरता और सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए नॉर्वे भारत को अपनी विश्व प्रसिद्ध जियोटेक्निकल एक्सपर्टाइज देगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परियोजनाओं को इससे बहुत मदद मिलेगी।

8. साइंटिस्ट और एक्सपर्ट्स का एक्सचेंज

क्लीन एनर्जी, क्लाइमेट एक्शन और हेल्थकेयर के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता हुआ है। इसके तहत दोनों देशों के वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों का आदान-प्रदान किया जाएगा।

9. CSIR और SINTEF के बीच बड़ी पार्टनरशिप

भारत की काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) और नॉर्वे की 'सिनटेफ' (SINTEF) के बीच टिकाऊ विकास के लिए समझौता हुआ है। ये दोनों संस्थाएं बायो-बेस्ड मैटेरियल्स, ओशन्स एनर्जी और कार्बन कैप्चर तकनीकों पर मिलकर काम करेंगी।

10. महासागरीय ऊर्जा पर विशेष फोकस

भारत के विशाल तटीय क्षेत्रों में ऑफशोर विंड और वेव एनर्जी जैसी तकनीकों को विकसित करने के लिए एक प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक इंप्लीमेंटेशन एग्रीमेंट साइन किया गया है। इससे भारत के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।

11. एजुकेशन और रिसर्च के लिए 'ग्रीन ट्रांजिशन' फंड्स

उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 'साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कोऑपरेशन फॉर द ग्रीन ट्रांजिशन' समझौता किया गया है। इसके जरिए भारत और नॉर्वे के छात्रों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी को एक-दूसरे के देश में जाकर पढ़ने और साझा प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा।

12. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को जियोसाइंटिफिक सपोर्ट

हैदराबाद स्थित CSIR-राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) और नॉर्वे की 'एमराल्ड जियोमॉडलिंग एएस' के बीच समझौता हुआ है। यह भारत में बड़े पैमाने पर बनने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (जैसे रेलवे, हाई-वे, डैम्स) के लिए एडवांस जियोसाइंटिफिक और मैपिंग सपोर्ट प्रदान करेगा, जिससे निर्माण की लागत और जोखिम दोनों कम होंगे।

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