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बंगाल चुनाव 2026 से पहले CPM को बड़ा झटका, प्रतीक उर रहमान ने तृणमूल का झंडा थामा

पिछले एक हफ्ते से प्रतीक-उर रहमान के पार्टी बदलने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उन्होंने खुद पहले ही कह दिया था कि 21 फरवरी को वे अपने राजनीतिक भविष्य पर फैसला लेंगे। CPM छोड़ने के बाद उन्होंने यह भी बताया था कि बंगाल की लगभग सभी पार्टियों ने उनसे संपर्क किया है

Suresh Kumarअपडेटेड Feb 21, 2026 पर 6:51 PM
बंगाल चुनाव 2026 से पहले CPM को बड़ा झटका, प्रतीक उर रहमान ने तृणमूल का झंडा थामा
आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शनिवार (21 फरवरी) को CPM युवा नेता प्रतीक-उर रहमान ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। आमतला स्थित पार्टी कार्यालय के सामने सड़क पर खड़े होकर उन्होंने औपचारिक रूप से तृणमूल की सदस्यता ली। इस मौके पर तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे।

पिछले एक हफ्ते से प्रतीक-उर रहमान के पार्टी बदलने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उन्होंने खुद पहले ही कह दिया था कि 21 फरवरी को वे अपने राजनीतिक भविष्य पर फैसला लेंगे। CPM छोड़ने के बाद उन्होंने यह भी बताया था कि बंगाल की लगभग सभी पार्टियों ने उनसे संपर्क किया है। हालांकि उन्होंने खुलकर किसी पार्टी का नाम नहीं लिया था, लेकिन तृणमूल में शामिल होने की चर्चा लगातार तेज होती जा रही थी।

आखिरकार उन्होंने लाल झंडा छोड़कर तृणमूल का झंडा थाम लिया और खास बात यह रही कि उन्होंने उसी अभिषेक बनर्जी का हाथ पकड़ा, जिनके खिलाफ वे लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। तृणमूल में शामिल होने के बाद प्रतीक-उर रहमान ने कहा, "हमारी नेता ममता बनर्जी बंगाल की शान के लिए लड़ रही हैं। इस समय भाजपा को रोकने के लिए तृणमूल की जरूरत है। भाजपा के खिलाफ लड़ाई में तृणमूल सबसे बड़ी ताकत है। इसी वजह से मैं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ आया हूं।"

वहीं, इस मौके पर अभिषेक बनर्जी ने CPM पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वाम दलों की कोई साफ सामाजिक सोच नहीं रही है। उन्होंने कहा, "तृणमूल की विचारधारा हाशिए पर पड़े लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने की है। CPM ने तो लोगों को भत्ता तक नहीं दिया। आज जो योजनाएं चल रही हैं, वे तृणमूल सरकार की देन हैं।" इसके साथ ही अभिषेक ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि प्रतीक-उर रहमान को विधानसभा टिकट देने का समझौता हुआ है। उन्होंने साफ कहा कि प्रतीक-उर ने खुद बताया है कि वे टिकट नहीं मांग रहे हैं और बिना किसी सौदे के पार्टी में आए हैं।

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