PM Narendra Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार कनाडा में होने वाले जी-7 समिट में शामिल नहीं होंगे। ऐसा माना जा रहा है कि भारत और कनाडा के बीच चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों की वजह से वह इस समिट से दूर रहेंगे। पिछले छह सालों में यह पहला मौका होगा जब प्रधानमंत्री मोदी जी-7 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं, यूरोपीय संघ, आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं।
धीमी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कनाडा की कोशिश
बता दें कि भारत अब जापान को पछाड़ कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। जानकारों का मानना है कि भारत, कनाडा के लिए एक अहम व्यापारिक साझेदार साबित हो सकता है, खासकर तब जब कनाडा अपनी धीमी पड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा में सरकार बदलने के बाद दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को सुधारने की दिशा में कुछ पहल जरूर की है, लेकिन इन संबंधों को पूरी तरह से सामान्य होने में अभी थोड़ा समय लग सकता है।
इस वजह से शामिल नहीं हो रहा भारत
मिली जानकारी के अनुसार, भारतजी-7 बैठक के लिए कनाडा से किसी भी आमंत्रण को स्वीकार नहीं करेगा। इसके पीछे मुख्य वजह सुरक्षा को लेकर चिंता बताई गई है। दरअसल, कनाडा में खालिस्तानी कट्टरपंथियों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर भारत पहले से ही गंभीर है। साथ ही, दोनों देशों के बीच रिश्तों में भी हाल के समय में तनाव बना हुआ है, जो इस फैसले की एक और अहम वजह माना जा रहा है।
कनाडा के झूठे आरोपों से बिगड़े हालात
भारत और कनाडा के रिश्ते तब काफी बिगड़ गए जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगा दिया। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और ट्रूडो कोई पक्के सबूत भी पेश नहीं कर पाए। इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक टकराव बढ़ गया। राजनयिकों को देश छोड़ने के आदेश दिए गए और भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवा को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया था।
जानकारों को यह उम्मीद थी कि कनाडा में चुनाव से पहले जब जस्टिन ट्रूडो ने पद छोड़ा और उनकी लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी ने कमान संभाली, तो देश में कुछ सकारात्मक बदलाव होंगे। कार्नी की अगुवाई में पार्टी को चुनाव में जीत भी मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच कनाडा की कमजोर होती अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत एक अहम और भरोसेमंद साझेदार साबित हो सकता है। ऐसे में कार्नी भारत से रिश्ते सुधारने पर ज़ोर दे सकते हैं।
भारत के साथ रिश्ते सुधारने पर कनाडा का जोर
हाल ही में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि कनाडा भारत के साथ अपने बिगड़े रिश्तों को दोबारा सुधारने का इच्छुक है और इसके लिए धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने को लेकर चर्चा की। जब अनीता आनंद से पूछा गया कि क्या इस बातचीत के बाद दोनों देशों में नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति होगी, तो उन्होंने साफ कहा कि इस दिशा में काम धीरे-धीरे और सोच-समझकर किया जाएगा।
ग्लोब एंड मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर पूछे गए सवाल पर कनाडा की एक अधिकारी ने कहा कि कानून के नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि इस मामले की जांच फिलहाल जारी है, इसलिए इस पर ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा।