
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे रविवार को करीब 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे। उन्होंने इस दौरे को बेहद भावुक बताया और कहा कि यह उनके लिए खास पल था, क्योंकि कभी यही जगह उन्हें अपने घर जैसी लगती थी। शिवसेना भवन में मीडिया से बात करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उनसे बार-बार यही पूछा जा रहा है कि इतने साल बाद यहां आकर कैसा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है, जैसे वे 20 साल बाद किसी लंबी कैद से बाहर आए हों।
राज ठाकरे ने कही ये बात
राज ठाकरे ने कहा कि शिवसेना भवन से उनका रिश्ता बहुत पुराना है और इससे जुड़ी उनकी यादें कई दशकों की हैं। उन्होंने बताया कि इस इमारत से जुड़े अनुभव इतने ज़्यादा हैं कि उन्हें बताने में कई दिन लग सकते हैं। राज ठाकरे ने 1977 का भी ज़िक्र किया, जब यह भवन बना था और वे उस दौर की कई बातें आज भी याद करते हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख ने 1997 की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनता पार्टी के एक जुलूस के दौरान शिवसेना भवन पर पत्थर फेंके गए थे, जिसके जवाब में शिवसैनिकों ने ऊपर से ट्यूबलाइट फेंककर विरोध करने वालों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल
राज ठाकरे का शिवसेना भवन आना ऐसे वक्त में हुआ है, जब महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल दिख रही है। करीब 20 साल पहले अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मतभेदों के बाद उन्होंने अविभाजित शिवसेना छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाई थी। अब दोनों नेताओं ने दिसंबर में होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले साथ आने का फैसला किया है। इस समझौते के तहत शिवसेना (UBT) और MNS 15 जनवरी को होने वाले मुंबई नगर निगम चुनाव समेत राज्य के 28 अन्य नगर निकाय चुनाव मिलकर लड़ेंगी। मुंबई में इस गठबंधन में शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी शामिल है। इस गठजोड़ को एक अहम और कड़े मुकाबले की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। वे देश के सबसे अमीर नगर निकाय पर फिर से अपनी पकड़ बनाना चाहते हैं। गौरतलब है कि अविभाजित शिवसेना ने 1997 से लेकर 2022 तक लगातार BMC पर शासन किया था। 227 सदस्यों वाली BMC समेत राज्य के कुल 29 नगर निकायों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं, जबकि मतगणना अगले दिन की जाएगी। इस बीच, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने इन नगर निकायों में अब तक 68 सीटें बिना मुकाबले जीत ली हैं। जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक मुकाबला और भी तेज़ होता जा रहा है।
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