चूहों ने मचा दी 8 करोड़ रुपए की लूट! छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदाम से गायब 26,000 क्विंटल अनाज, घपलेबाजी या लापरवाही?

शिकायत में सिर्फ धान की कमी की बात नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा किया गया है। आरोप है कि धान के आने-जाने के फर्जी रिकॉर्ड बनाए गए, खरीदी के नाम पर नकली बिल दिखाए गए, मजदूरों की झूठी हाजिरी भरी गई और सबसे चौंकाने वाली बात यह कि कई अहम समय पर CCTV कैमरे बंद कर दिए गए, ताकि सच्चाई सामने न आ सके

अपडेटेड Jan 09, 2026 पर 7:48 PM
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चूहों ने मचा दी 8 करोड़ रुपए की लूट! छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदाम से गायब 26,000 क्विंटल अनाज (PHOTO- AI)

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर बड़ी चोरी की बातें बैंक लॉकर या ज्वेलरी शोरूम से जुड़ी होती हैं, लेकिन इस बार मामला सरकारी धान खरीदी केंद्रों का है। आरोप है कि यहां से 26,000 क्विंटल धान गायब हो गया और इसकी वजह चूहे, दीमक और कीड़ों को बताया जा रहा है। धान की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए आंकी जा रही है, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

NDTV के मुताबिक, यह मामला कबीरधाम जिले के बाजार चरभट्टा और बघर्रा धान प्रोक्योरमेंट सेंटर से जुड़ा है, जहां 2024–25 सीजन में किसानों से खरीदा गया धान रखा गया था। जांच में सामने आया कि दोनों केंद्रों को मिलाकर 26,000 क्विंटल धान का कोई हिसाब नहीं है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी बाजार चरभट्टा केंद्र में मिली, जहां अकेले करीब 5 करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगाते हुए केंद्र के इंचार्ज के खिलाफ उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई गई है।

शिकायत में सिर्फ धान की कमी की बात नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा किया गया है। आरोप है कि धान के आने-जाने के फर्जी रिकॉर्ड बनाए गए, खरीदी के नाम पर नकली बिल दिखाए गए, मजदूरों की झूठी हाजिरी भरी गई और सबसे चौंकाने वाली बात यह कि कई अहम समय पर CCTV कैमरे बंद कर दिए गए, ताकि सच्चाई सामने न आ सके।


जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने माना कि बाजार चरभट्टा केंद्र के प्रभारी प्रीतेश पांडेय को हटा दिया गया है, लेकिन धान गायब होने की वजह मौसम और कीटों को बताया गया। उनका कहना है कि धान खुले में रखा गया था, जिसे चूहों, दीमक और कीड़ों ने नुकसान पहुंचाया, और जिले की स्थिति राज्य के दूसरे केंद्रों की तुलना में बेहतर है। यही बयान अब लोगों के गुस्से और अविश्वास की बड़ी वजह बन गया है।

मामले की जांच कर रहे सहायक जिला खाद्य अधिकारी मदन साहू ने बताया कि शिकायत काफी बड़ी है और शुरुआती जांच में आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 23 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है और फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद साफ हो गया है कि मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि गंभीर अनियमितताओं का हो सकता है।

मुद्दा सामने आते ही राजनीति भी गरमा गई। कांग्रेस ने जिला विपणन अधिकारी कार्यालय के बाहर चूहेदानी लेकर विरोध प्रदर्शन किया और तंज कसते हुए कहा कि अगर चूहों ने करोड़ों का धान खा लिया है, तो पहले उन्हें पकड़ा जाए। पार्टी ने तत्काल FIR दर्ज करने, उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस घोटाले में मिलीभगत है और जिम्मेदार लोगों को राजनीतिक संरक्षण देकर बचाने की कोशिश की जा रही है।

अब कवर्धा में हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि क्या वाकई चूहे और दीमक इतने ताकतवर हो सकते हैं कि 8 करोड़ रुपए का धान खा जाएं, या फिर यह सब कागजों पर रचा गया एक बड़ा घोटाला है। जांच अभी चल रही है, लेकिन इस मामले ने सरकारी व्यवस्था और धान खरीदी प्रणाली की साख को बुरी तरह हिला दिया है।

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