Nagpur Cyber Fraud: रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर को ठगों ने लगाया चूना, डिजिटल अरेस्ट में फंसाकर लूटे ₹2 करोड़

Nagpur Cyber Fraud: नागपुर में हाल ही में एक 76 साल के रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर साइबर ठगी का शिकार हो गए। जालसाजों ने उन्हें फर्जी 'डिजिटल गिरफ्तारी' में फंसाकर उनसे 2 करोड़ रुपये ठग लिए। बता दें कि यह घटना 23 मार्च से 3 अप्रैल के बीच की है।

अपडेटेड Apr 13, 2026 पर 1:32 PM
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नागपुर में रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2 करोड़ की ठगी

Nagpur Cyber Fraud: नागपुर में हाल ही में एक 76 साल के रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर साइबर ठगी का शिकार हो गए। जालसाजों ने उन्हें फर्जी 'डिजिटल गिरफ्तारी' में फंसाकर उनसे 2 करोड़ रुपये ठग लिए। बता दें कि यह घटना 23 मार्च से 3 अप्रैल के बीच की है, जब ठगों ने खुद को सुप्रीम कोर्ट, प्रवर्तन निदेशालय (ED), मुंबई पुलिस और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का अधिकारी बताकर उन्हें डराया।

रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर को भरोसा दिलाने के लिए ठगों ने व्हाट्सएप पर फर्जी दस्तावेज भी भेजे, जिन पर सरकारी मुहर जैसी दिखने वाली सील लगी हुई थी। डर की वजह से डॉक्टर बहुत घबरा गए और ठगों की सभी बातों पर विश्वास कर बैठे।

ठगों ने उसे धमकाया और कहा कि उसे अपना अकाउंट "सुरक्षित" करने या चल रही "जांच" को पूरा करने के लिए ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने होंगे। ज्यादा दबाव में आकर डॉक्टर ने अपने बैंक अकाउंट से ठगों को 2 करोड़ रुपये की भारी रकम ट्रांसफर कर दी।


इस मामले में नागपुर साइबर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 66 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल, जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

'डिजिटल गिरफ्तारी' इतना असरदार कैसे होती है?

इस ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), अन्य सरकारी विभागों या यहां तक कि अदालत के अधिकारी के रूप में पेश करते हैं। वे सरकारी दफ्तर जैसा माहौल बनाते हैं और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को धमकाते हैं।

ठग पीड़ित से कहते हैं, "वे वीडियो फ्रेम से बाहर नहीं जा सकते और न ही किसी से बात कर सकते हैं," इस तरह उन्हें लगातार निगरानी में रखते हैं, जिसे ‘डिजिटर अरेस्ट’ कहा जाता है। वे असली दिखने वाली सरकारी मुहरों वाले नकली दस्तावेज भेजकर पीड़ित को इस जाल में फंसा लेते हैं। पीड़ित को तब तक कैमरे के सामने रहने के लिए मजबूर किया जाता है जब तक कि वह पैसे ट्रांसफर न कर दे।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि कोई भी सरकारी ऑफिस, अधिकारी या जांच टीम वीडियो कॉल के जरिए जांच नहीं करती। इसके बावजूद, कई पढ़े-लिखे शिक्षित व्यक्ति ऐसे जटिल घोटालों का शिकार हो जाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट्स ने नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोई 'डिजिटल गिरफ्तारी' या 'फर्जी वारंट' के नाम पर पैसे या पर्सनल जानकारी मांगता है, तो उन पर भरोसा न करें और तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

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