PM Modi-Rising Bharat Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'राइजिंग भारत समिट 2026' में देश के बदलते आर्थिक रूतबे पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत ने अब अपनी पुरानी 'गुलामी वाली मानसिकता' को पूरी तरह त्याग दिया है। पीएम के अनुसार, एक समय था जब भारत अपनी नीतियों और क्षमताओं पर खुद संदेह करता था, लेकिन आज भारत एक ऐसी ताकत बन चुका है कि विकसित देश खुद आगे बढ़कर भारत के साथ व्यापारिक समझौते करने के लिए उत्सुक हैं।
मानसिक गुलामी से आजादी और नई पहचान
प्रधानमंत्री ने देश की पुरानी सोच पर प्रहार करते हुए कहा कि आजादी के बाद भी लंबे समय तक हम मानसिक गुलामी के शिकार रहे। पीएम ने कहा कि पहले हमें यह महसूस कराया गया कि हम अशिक्षित हैं और हमें केवल दूसरों का अनुसरण करना चाहिए। हम हमेशा अंतरराष्ट्रीय तकनीकों की नकल करते थे और दुनिया से मान्यता मिलने का इंतजार करते थे। पिछले 11 वर्षों में भारत ने अपनी खोई हुई क्षमता को फिर से पहचाना है। अब भारत दूसरों के पीछे नहीं चलता, बल्कि अपनी शर्तों पर दुनिया के साथ हाथ मिलाता है।
दुनिया क्यों है भारत के साथ व्यापार को बेताब?
पीएम मोदी ने मौजूदा वैश्विक माहौल का जिक्र करते हुए बताया कि आज विकसित देश भारत की ओर क्यों आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत आज भी 'पॉलिसी पैरालिसिस' का शिकार होता या 'फ्रेजाइल फाइव' में शामिल होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार नहीं करता। पिछले दशक के संरचनात्मक सुधारों और आर्थिक स्थिरता ने दुनिया का भरोसा जीता है। यही कारण है कि आज बड़े-बड़े विकसित राष्ट्र भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी करना चाहते हैं।
ऐतिहासिक व्यापार समझौते की नई मिसाल
समिट के दौरान भारत की हालिया कूटनीतिक जीत की भी चर्चा हुई। पिछले महीने भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता किया है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील' कहा जा रहा है। वहीं इसी महीने अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच को और आसान बनाएगा।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव अचानक नहीं आया है, बल्कि यह 11 साल के कठिन परिश्रम और बेहतर शासन का परिणाम है। भारत अब केवल एक बाजार नहीं है, बल्कि एक ग्लोबल लीडर के रूप में उभर रहा है, जिसकी आर्थिक ताकत को अब पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है।