Rajasthan Mid Day Meal Scam: मिड-डे मील योजना में ₹2000 करोड़ का घोटाला, ACB ने 21 आरोपियों पर दर्ज की FIR

Rajasthan Mid Day Meal Scam: राजस्थान की चर्चित मिड-डे मील योजना में 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम का घोटाला सामने आने के बाद ACB ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज किया है। इसमें कॉनफैड (CONFED) और निजी फर्मों के 21 लोगों को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 1:51 PM
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Rajasthan: मिड-डे मील योजना में ₹2000 करोड़ का घोटाला, ACB ने 21 आरोपियों पर दर्ज की FIR

Rajasthan Mid Day Meal Scam: राजस्थान की चर्चित मिड-डे मील योजना में 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम का घोटाला सामने आने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज किया है। इसमें कॉनफैड (CONFED) और निजी फर्मों के 21 लोगों को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बता दें कि यह मामला उस समय का है जब कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूल बंद थे और सरकार ने कॉनफैड (CONFED) के जरिए छात्रों को घर-घर दाल, तेल, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री के पैकेट बांटने की योजना शुरू की थी।

ACB के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान, राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (कॉन्फेड) के माध्यम से दाल, तेल, मसाले आदि युक्त कॉम्बो पैक की आपूर्ति की गई थी। ये पैकेट राज्य सरकार की मिड डे मील योजना के तहत स्कूली छात्रों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए भेजे गए थे। दावा किया गया था कि यह सामग्री FSSAI और एगमार्क मानकों के अनुरूप है और इसे राज्य के स्कूलों तक पहुंचाया जाना था।

लेकिन, इस योजना के कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं, जिसके चलते भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने FIR दर्ज की।


ACB की जांच में क्या पता चला?

ACB की प्रारंभिक जांच में पता चला कि मिड डे मील योजना और कॉन्फेड से जुड़े अधिकारियों ने नियमों में हेरफेर करने के लिए मिलीभगत की थी। जिसके चलते, योग्य और पात्र फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया और पसंदीदा फर्मों को टेंडर देकर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इन फर्मों ने फिर अवैध रूप से अनुबंधों को अन्य संस्थाओं को दे दिया, जिसके माध्यम से फर्जी सप्लायर और ट्रांसपोर्टरों का एक पूरा नेटवर्क स्थापित हो गया।

जांच में यह भी पता चला कि कई मामलों में, वास्तव में माल की खरीद या आपूर्ति किए बिना ही, बढ़ी हुई दरों के फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए और उन्हीं के आधार पर सरकारी भुगतान प्राप्त किए गए। ACB ने कहा, "इस सुनियोजित धोखाधड़ी, जालसाजी और मिलीभगत के कारण राज्य के खजाने को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का गंभीर वित्तीय नुकसान हुआ।"

अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज 

ACB की FIR में कॉन्फेड के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिनमें सहायक लेखा अधिकारी संवतराम, प्रबंधक (सिविल आपूर्ति) राजेंद्र, प्रबंधक (सिविल आपूर्ति) लोकेश कुमार बापन्ना, सहायक प्रबंधक प्रतिभा सैनी, प्रबंधक (परियोजना) योगेंद्र शर्मा, प्रबंधक राजेंद्र सिंह शेखावत, मार्केटिंग सेक्शन के गोदाम प्रभारी रामधन बैरवा और मार्केटिंग के सुपरवाइजर दिनेश कुमार शर्मा शामिल हैं।

अन्य आरोपियों में सेंट्रल स्टोर के कर्मचारी शैलेश सक्सेना (क्षेत्रीय प्रबंधक), बी सी जोशी (उप प्रबंधक) और चंदन सिंह (सहायक प्रबंधक) शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, ACB की FIR में मेसर्स तिरुपति सप्लायर्स, मेसर्स जागृत एंटरप्राइजेज, मेसर्स एमटी एंटरप्राइजेज, मेसर्स साई ट्रेडिंग के मालिक और कंवलजीत सिंह राणावत, मधुर यादव, त्रिभुवन यादव, सतीश मुलचंद व्यास, दीपक व्यास और रितेश यादव सहित अन्य व्यक्तियों के नाम भी शामिल हैं।

ACB अधिकारियों ने बताया कि वे मामले में आरोपियों की भूमिका की गहन जांच कर रहे हैं, जिसमें वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों की जालसाजी और सरकारी धन का दुरुपयोग शामिल है। अधिकारियों ने कहा, "सबूत जुटाना, रिकॉर्ड की समीक्षा करना और अन्य आवश्यक जांच प्रक्रियाएं जारी हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

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