BJP से इस्तीफे के बाद चर्चा में शहजाद पूनावाला की फैमिली का गांधी-वाड्रा परिवार से है एक खास कनेक्शन! जानिए इनकी पूरी प्रोफाइल

अपडेटेड Jul 31, 2026 पर 3:49 PM
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चर्चित राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी से अचानक इस्तीफा देकर सभी को हैरान कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चर्चित राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी से अचानक इस्तीफा देकर सभी को हैरान कर दिया है। पूनावाला ने इस मु्द्दे पर सार्वजनिक तौर पर अभी तक कुछ नहीं कहा है, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल X पर अपना बायो अपडेट किया है। इस ताजा अपडेट में अब बीजेपी या बीजेपी से जुड़े होने का कोई जिक्र नहीं है। इसके बाद यह खबरें भी आ गईं कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

शहजाद पूनावाला राजनीति क्यों छोड़ना चाहते हैं?

अपने इस्तीफे की खबरें सामने आने से एक दिन पहले भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने एक पुराना इंटरव्यू शेयर किया, जिसमें उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि वह पिछले 18-19 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं। उन्होंने बहुत कम उम्र में राजनीतिक सफर शुरू किया था और अब उन्हें लगता है कि उन्होंने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।


शहजाद पूनावाला ने बताया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार तीसरी जीत के बाद उन्होंने राजनीति से अलग होने का मन बना लिया था। हालांकि, उन्होंने दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए काम करने का फैसला किया और सक्रिय बने रहे। उन्होंने कहा कि अब उन्हें लगता है कि सक्रिय राजनीतिक जीवन से आगे बढ़ने और नई दिशा में काम करने का समय आ गया है।

कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पहले शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2008 में कांग्रेस से की थी। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वह पुणे में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के उपाध्यक्ष रहे। इसके अलावा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की मीडिया सेल की रिसर्च टीम के सदस्य और महाराष्ट्र कांग्रेस में सचिव के पद पर भी काम किया। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा और पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल हो गए।

2017 में बदला राजनीतिक सफर

शहजाद पूनावाला के राजनीतिक करियर में 2017 बड़ा मोड़ साबित हुआ। उस समय उन्होंने कांग्रेस के आंतरिक अध्यक्ष पद के चुनाव पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी के अंदर होने वाला चुनाव निष्पक्ष नहीं था और इसमें राहुल गांधी को आगे बढ़ाने के लिए धांधली की गई। शहजाद ने मांग की थी कि अध्यक्ष पद का चुनाव पारदर्शी और योग्यता के आधार पर कराया जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि क्या राहुल गांधी अपने पद से इस्तीफा देकर एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह चुनाव लड़ेंगे। इन बयानों के बाद कांग्रेस में उनका विरोध बढ़ गया। धीरे-धीरे वह पार्टी में अलग-थलग पड़ गए और अंततः कांग्रेस से बाहर हो गए।

पीएम मोदी की तारीफ के बाद भाजपा में हुए शामिल

साल 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहजाद पूनावाला की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र को लेकर उठाए गए उनके सवालों का जिक्र किया था। माना जाता है कि इसके बाद शहजाद पूनावाला के राजनीतिक सफर में बड़ा बदलाव आया। कुछ समय बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया और आगे चलकर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। तब से शहजाद पूनावाला टीवी चैनलों की बहसों में भाजपा का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। वह अक्सर पार्टी की नीतियों का बचाव करते हैं और विपक्ष के आरोपों का जवाब देते नजर आते हैं।

वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक भी हैं शहजाद पूनावाला

शहजाद पूनावाला का जन्म 17 अक्टूबर 1987 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। वह पेशे से वकील हैं और सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं। मुख्यधारा की राजनीति में आने से पहले उन्होंने कानूनी और संवैधानिक मामलों पर काम किया। साल 2013 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से जुड़े एक आवास भेदभाव मामले में वह याचिकाकर्ता भी रहे। इस मामले में उन्होंने लोगों के साथ धर्म के आधार पर कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी। राजनीति के अलावा शहजाद पूनावाला कई प्रमुख समाचार पत्रों के लिए लेख भी लिख चुके हैं। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस, मेल टुडे और हिंदुस्तान टाइम्स जैसे अखबारों में राजनीति, विदेश नीति और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार प्रकाशित किए हैं।

मां ने की परवरिश, भाई से अलग हैं राजनीतिक विचार

शहजाद पूनावाला की परवरिश उनकी मां यास्मीन पूनावाला ने की। उनके पिता सरफराज पूनावाला, जो एक कारोबारी थे, का निधन तब हो गया था जब शहजाद काफी छोटे थे। उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला राजनीतिक विश्लेषक हैं और कांग्रेस के समर्थन में अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं। दोनों भाई पहले काफी करीब थे, लेकिन 2017 में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर शहजाद के सार्वजनिक विरोध के बाद उनके राजनीतिक रास्ते अलग हो गए। तहसीन पूनावाला की शादी मोनिका वाड्रा से हुई है, जो रॉबर्ट वाड्रा की रिश्तेदार हैं। इसी वजह से पूनावाला परिवार का गांधी-वाड्रा परिवार से भी पारिवारिक संबंध है।

भाजपा के प्रमुख प्रवक्ताओं में बनाई पहचान

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद शहजाद पूनावाला ने पार्टी के प्रमुख अंग्रेजी भाषी राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में अपनी पहचान बनाई। वह अक्सर बड़े टीवी चैनलों की राजनीतिक बहसों में भाजपा का पक्ष रखते नजर आते थे। इन बहसों में उन्होंने गांधी परिवार की कथित वंशवादी राजनीति, संवैधानिक और कानूनी मुद्दों, अल्पसंख्यक मामलों, राष्ट्रीय सुरक्षा, समान नागरिक संहिता (UCC), तीन तलाक कानून, केंद्र सरकार की जनकल्याण योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन जैसे विषयों पर भाजपा का पक्ष मजबूती से रखा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।