पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत आने वाले दो तेल टैंकर 5 से 10 मार्च के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरकर आए। इन टैंकरों में करीब 30 लाख बैरल कच्चा तेल था और ये इराक और सऊदी अरब से लोड किए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, इन जहाजों ने गुजरते समय अपने ट्रांसपोंडर (लोकेशन बताने वाला सिस्टम) बंद कर दिए थे, ताकि उनकी आवाजाही का पता न चल सके। इनमें से एक टैंकर ने Al‑Basra ऑयल टर्मिनल से तेल भरा था, जबकि दूसरा सऊदी अरब के पूर्वी तट से रवाना हुआ था।
Moneycontrol को सूत्रों ने बताया कि सऊदी अरब अब अपने पश्चिमी तट के यानबू पोर्ट से तेल की लोडिंग बढ़ा रहा है। इसके लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को बायपास किया जा सके।
बुधवार को हालात और तनावपूर्ण हो गए जब थाईलैंड के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज, जो भारत की ओर आ रहा था, होर्मुज से गुजरते समय हमले का शिकार हो गया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और बचाव अभियान चलाना पड़ा।
इसी बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची से फोन पर बातचीत की। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत थी।
भारत सरकार इस समय अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर खास सतर्क है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग 10 दिनों से बंद जैसा बना हुआ है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (U.S. Energy Information Administration) के अनुसार, 2025 में हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल होर्मुज से गुजरता था, जो दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25% है।
इस बीच भारत ने भी वैकल्पिक रास्तों से तेल आयात बढ़ा दिया है। सऊदी अरब की लगभग 1200 किमी लंबी पाइपलाइन हर दिन करीब 50 लाख बैरल तेल को यानबु तक पहुंचाती है, जिससे होर्मुज से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती।
इसी तरह अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन भी रोज करीब 15 लाख बैरल तेल को सीधे गल्फ ऑफ ओमान तक पहुंचा सकती है।
सरकार के अनुसार, पहले भारत का करीब 55% कच्चा तेल होर्मुज़ के रास्ते आता था, लेकिन अब यह घटकर लगभग 25% रह गया है और 75% तेल दूसरे रास्तों से आने लगा है।
साथ ही फिलहाल 28 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिन पर करीब 778 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार उनकी सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है।