अमेरिका की नई 'ट्रेड जांच' से 16 देशों पर टैरिफ का खतरा, समझिए क्या है सेक्शन- 301 और भारत पर क्या होंगे इसके प्रभाव?

US Section 301: USTR जांच के दौरान जनता और उद्योग समूहों से सबूत जुटाता और सुनवाई करता है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि कोई देश अनुचित व्यापार व्यवहार कर रहा है, तो अमेरिका मनमाने ढंग से टैरिफ बढ़ा सकता है, सेवाओं पर प्रतिबंध लगा सकता है या अन्य व्यापारिक दंड लागू कर सकता है

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 1:07 PM
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यह कानून अमेरिकी सरकार को उन विदेशी व्यापारिक नीतियों की जांच करने का अधिकार देता है जिसे अमेरिका 'अनुचित' मानता है

US Section 301 Investigation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बुधवार को एक बड़ा व्यापारिक कदम उठाया है। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 16 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ एक नई 'ट्रेड जांच' शुरू की है। इस जांच का मुख्य आधार 'अत्यधिक औद्योगिक क्षमता' बताया जा रहा है। अमेरिकी ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत ये जांच शुरू की गई है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्या है इसमें प्रावधान।

किन देशों को घेरा गया है?

इस सूची में भारत के साथ-साथ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ताइवान, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे है। एक दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार 'कनाडा' इस सूची से बाहर है।


क्या है सेक्शन 301?

अमेरिकी 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 301, ट्रेड को लेकर अमेरिका के पास उपलब्ध सबसे शक्तिशाली हथियारों में से एक है। यह कानून अमेरिकी सरकार को उन विदेशी व्यापारिक नीतियों की जांच करने का अधिकार देता है जिसे अमेरिका 'अनुचित' मानता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि(USTR) इस दौरान जनता और उद्योग समूहों से सबूत जुटाता है और सुनवाई करता है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि कोई देश अनुचित व्यापार व्यवहार कर रहा है, तो अमेरिका मनमाने ढंग से टैरिफ बढ़ा सकता है, सेवाओं पर प्रतिबंध लगा सकता है या अन्य व्यापारिक दंड लागू कर सकता है।

भारत को क्यों शामिल किया गया?

अमेरिका ने भारत को इस सूची में शामिल करने के लिए कुछ प्रमुख तर्क दिए हैं, जो लंबे समय से वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच चर्चा का विषय रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि भारत कुछ खास उत्पादों पर बहुत अधिक आयात शुल्क लगाता है, जो अमेरिकी कंपनियों के लिए बाधा है। भारत के डेटा लोकलाइजेशन नियम और डिजिटल सेवाओं से जुड़े नियम अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। भारत में कुछ क्षेत्रों में 'स्थानीय रूप से सामान खरीदने' की अनिवार्य शर्तें भी अमेरिका की चिंता का विषय हैं। दवा उद्योग में भारत के प्राइस कंट्रोल के नियम भी अमेरिकी कंपनियों को परेशान करते हैं।

यह जांच इस साल गर्मियों तक नए टैरिफ या व्यापारिक प्रतिबंधों का रास्ता साफ कर सकती है। ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य अपने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और व्यापार घाटे को कम करना है। यह कदम संकेत देता है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में कूटनीतिक दबाव बढ़ सकते है।

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