US Unfair Trade Probe: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर हलचल मचा दी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पिछले टैरिफ प्रोग्राम के एक मुख्य हिस्से को अवैध घोषित किए जाने के बाद, प्रशासन ने अब 'सेक्शन 301' के तहत एक नई और बड़ी व्यापारिक जांच शुरू की है। इस जांच के दायरे में भारत समेत दुनिया की 16 बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
इस लिस्ट में भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे है। इन 16 देशों पर आरोप है कि इनके पास औद्योगिक क्षमता जरूरत से ज्यादा है, जिससे वैश्विक बाजार में सस्ते सामान की बाढ़ आ रही है और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान पहुंच रहा है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने बुधवार को बताया कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया है जिसने ट्रंप के पुराने टैरिफ ढांचे को झटका दिया था। अमेरिका का मानना है कि ये देश अपनी घरेलू मांग से कहीं ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं, जिससे वैश्विक कीमतों में गिरावट आ रही है। जांच में सरकारी सब्सिडी, कम मजदूरी, मुद्रा में हेरफेर, और कमजोर पर्यावरण व श्रम मानकों जैसे पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी।
जुलाई तक लग सकते हैं नए टैरिफ
ट्रंप प्रशासन इस जांच को बेहद तेजी से पूरा करना चाहता है:
15 अप्रैल: सार्वजनिक टिप्पणी भेजने की आखिरी तारीख।
5 मई: सार्वजनिक सुनवाई होगी।
जुलाई: जांच पूरी होने और नए टैरिफ लागू होने की संभावना है। प्रशासन चाहता है कि फरवरी में लगाए गए 'अस्थायी टैरिफ' के खत्म होने से पहले ये नए स्थाई टैरिफ लागू हो जाएं।
बंधुआ मजदूरी पर भी कार्रवाई
USTR प्रतिनिधि ग्रीर ने संकेत दिया कि गुरुवार से एक और जांच शुरू होगी, जो विशेष रूप से बंधुआ मजदूरी से तैयार किए गए सामानों पर केंद्रित होगी। इस जांच में दुनिया भर के 60 से अधिक देश शामिल हो सकते हैं। वाशिंगटन चाहता है कि उसके व्यापारिक भागीदार भी बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के मामले में अमेरिकी कानूनों का पालन करें।