Sugar Price Hike: महंगी होती जा रही चीनी के पीछे अल नीनो और Red Rot को बताया जा रहा वजह, क्या है ये रेड रॉट?

Sugar Prices Rise: चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर देश में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 'रेड रॉट' बीमारी और 'अल नीनो' की वजह से कम उत्पादन को जिम्मेदार ठहराया है। जबकि विपक्षी नेताओं ने सरकार की चीनी नीति, किसानों के पेमेंट और इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं

अपडेटेड Aug 24, 2026 पर 12:20 PM
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Sugar Price Hike: केंद्र ने रेड रॉट और अल नीनो को महंगी चीनी की वजह बताया है

Sugar Price Hike: चीनी की बढ़ती कीमतों ने देश में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सरकार ने चीनी उत्पादन में कमी के लिए 'रेड रॉट' बीमारी और 'अल नीनो' को जिम्मेदार ठहरा रही है। वहीं, विपक्ष ने सरकार की चीनी नीति, किसानों के बकाया भुगतान और गन्ने को एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किए जाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि करीब एक महीने में ही चीनी की खुदरा कीमत में बड़ा उछाल देखने को मिला है।

एक महीने में ₹7.52 किलो महंगी हुई चीनी

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की खुदरा कीमत ₹48.18 प्रति किलो थी। जबकि 20 अगस्त तक यह बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो पहुंच गई। यानी करीब एक महीने में चीनी के दाम में ₹7.52 प्रति किलो, लगभग 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कीमतों में इस तेजी ने आम परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।


सरकार ने बताया क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार चीनी उत्पादन में आई कमी को लेकर चिंतित है। उनके मुताबिक, गन्ने की फसल पर 'रेड रॉट बीमारी' और 'अल नीनो की परिस्थितियों' का असर पड़ा है। जोशी ने कहा कि इन कारणों से सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर चीनी उत्पादन पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि देश में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन है। फिलहाल भारत के पास 20-25 लाख टन से अधिक का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है।

त्योहारों से पहले सरकार ने उठाया बड़ा कदम

आने वाले त्योहारों को देखते हुए सरकार ने चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें कच्ची चीनी (Raw Sugar) के अस्थायी आयात का फैसला भी शामिल है। सरकार का कहना है कि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ सकती है, इसलिए बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी है। आयात के जरिए घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि कीमतों पर दबाव कम हो सके।

विपक्ष ने किसानों के भुगतान पर घेरा

सरकार के तर्क के बाद मामला राजनीतिक हो गया। कांग्रेस महासचिव और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण किसान गन्ने की खेती से हतोत्साहित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब भारत पहले चीनी का निर्यात करता था तो अब आयात की जरूरत क्यों पड़ रही है।

सुरजेवाला ने कहा कि देश में Sugar Control Order के तहत चीनी की कीमतें तय की जाती हैं। लेकिन अगर किसानों को गन्ने का भुगतान लंबे समय तक नहीं मिलता तो वे अगली फसल लगाने के लिए क्यों प्रोत्साहित होंगे।

Ethanol को लेकर भी सरकार पर निशाना

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीनी के साथ-साथ आलू, प्याज और लहसुन जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने खास तौर पर गन्ने को एथेनॉ़ल उत्पादन की ओर मोड़ने पर सवाल किया। उनका तर्क है कि अगर चीनी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल ईंधन बनाने में चला जाएगा तो चीनी उत्पादन और उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

तिवारी ने इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इस स्थिति से किन कारोबारी हितों और लोगों को फायदा हो रहा है, जबकि महंगाई का बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने भी गन्ने के Ethanol उत्पादन में इस्तेमाल को लेकर सरकार की आलोचना की। साथ ही महंगाई से प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद करने की बात कही।

सरकार ने Ethanol वाले आरोप को किया खारिज

विपक्ष के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि हालिया चीनी कीमत वृद्धि को एथेनॉल के लिए गन्ने के डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, चीनी से Ethanol की ओर डायवर्ट होने वाली मात्रा का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश के एथेनॉल उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का से आता है। यानी सरकार के मुताबिक, मौजूदा चीनी कीमतों के पीछे Ethanol के लिए गन्ने के इस्तेमाल को मुख्य कारण बताना सही नहीं है।

अब आगे क्या होगा?

सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों को कंट्रोल रखना है। एक तरफ उत्पादन में कमी और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष किसानों के भुगतान और एथेनॉल नीति को लेकर सवाल उठा रहा है।

फिलहाल केंद्र का दावा है कि देश में जरूरत से अधिक चीनी का स्टॉक मौजूद है और बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया जा रहा है, तो एक महीने में खुदरा कीमत ₹48.18 से बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो कैसे पहुंच गई?

रेड रॉट में क्या होता है?

रेड रॉट (Red Rot) फंगस से होने वाली गन्ने की एक गंभीर फफूंदजनित बीमारी है। इसे गन्ने की प्रमुख बीमारियों में गिना जाता है। इसका असर सीधे गन्ने की पैदावार तथा चीनी की रिकवरी पर पड़ सकता है। इस बीमारी में गन्ने के तने के अंदर लाल या लाल-भूरे रंग के धब्बे/सड़न दिखाई देने लगती है। तने को काटने पर अंदर लाल रंग के हिस्से नजर आ सकते हैं। कई बार उनमें सफेद धारियां भी दिखाई देती हैं।

फसल को कैसे नुकसान होता है?

  • गन्ने के पौधे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं।
  • पत्तियां पीली होकर सूख सकती हैं।
  • तने के अंदर का ऊतक सड़ने लगता है।
  • संक्रमित गन्ने का वजन और गुणवत्ता दोनों घट सकते हैं।
  • ससे गन्ने की पैदावार और चीनी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

यह फैलती कैसे है?

रेड रॉट मुख्य रूप से संक्रमित बीज-गन्ने (सेट), संक्रमित मिट्टी और खेत में मौजूद संक्रमित अवशेषों के जरिए फैल सकती है। अधिक नमी और अनुकूल मौसम बीमारी के फैलाव में मदद कर सकते हैं। चीनी उत्पादन वाली खबर में रेड रॉट का जिक्र महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर बड़े क्षेत्र में गन्ने की फसल प्रभावित होती है तो गन्ने की उपलब्धता और आगे चलकर चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

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