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बंगाल SIR विवाद पर SC की एंट्री, TMC की याचिका पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब

TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश की जा रही है, जिससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है। इसी को लेकर डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने अदालत में पक्ष रखा

Suresh Kumarअपडेटेड Jan 12, 2026 पर 9:08 PM
बंगाल SIR विवाद पर SC की एंट्री, TMC की याचिका पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब
'चुनाव आयोग की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं...', SIR को लेकर TMC पहुंची सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर चल रहे गहमा-गहमी के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। यह मामला TMC के दो राज्यसभा सांसदों, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर याचिकाओं पर सुना गया। सोमवार (12 जनवरी) को इस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने आयोग को नोटिस जारी किया और इस सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला?

बंगाल में चुनाव से पहले राज्य में SIR प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत मतदाता सूची की गहन जांच कर नामों का सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं को अनमेप्ड कैटेगरी में रखा गया है और नोटिस भेजकर दस्तावेज दिखाने के लिए बुलाया जा रहा है। इसमें कई बुजुर्ग महिला भी शामिल हैहाल ही में एक बुजुर्ग की SIR के डर से आत्महत्या करने की ख़बर भी आई थी।

TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश की जा रही है, जिससे चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है। इसी को लेकर डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने अदालत में पक्ष रखा।

कपिल सिबल ने क्या कहा?

कपिल सिबल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग कई निर्देश व्हाट्सएप के जरिए दे रहा है, जो किसी संवैधानिक संस्था के लिए ठीक नहीं है। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया असंस्थागत और मनमानी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मतदाताओं को बिना ठोस वजह के सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। आयोग जिन 'तार्किक विसंगतियों' की बात कर रहा है, वे असल में अतार्किक हैं। इससे आम लोगों में डर और भ्रम फैल रहा है, खासकर गरीब, बुजुर्ग और नए मतदाताओं के बीच।

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