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'पायजामा का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश नहीं' सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाई कोर्ट का ये फैसला, कहा- इससे सहमत नहीं

अंतिम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था में संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि कोर्ट ने खुद कोई गाइडलाइन जारी नहीं की, लेकिन उसने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी भोपाल को विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश दिया है

Shubham Sharmaअपडेटेड Feb 18, 2026 पर 1:41 PM
'पायजामा का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश नहीं' सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाई कोर्ट का ये फैसला, कहा- इससे सहमत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहबाद हाई कोर्ट का ये फैसला, कहा- इससे सहमत नहीं

11 साल की बच्ची के साथ हुई घटना पर आए एक फैसले ने देशभर में सवाल खड़े कर दिए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है- ऐसे मामलों को सिर्फ कानूनी तकनीकी शब्दों से नहीं, बल्कि संवेदनशील नजरिए से भी देखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि पायजामा का नाड़ा खोलना, “रेप या रेप की कोशिश” नहीं मानी जाएंगी।

प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, दो आरोपियों- पवन और आकाश ने 11 साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ की। आरोप है कि उन्होंने उसके कपड़े खींचे, पायजामे की डोरी तोड़ी और उसे पुलिया के नीचे घसीटने की कोशिश की।

लोगों के पहुंचने पर आरोपी मौके से भाग गए।

ट्रायल कोर्ट ने इस घटना को रेप की कोशिश और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध मानते हुए IPC की धारा 376 और POCSO कानून के तहत मामला चलाने का आदेश दिया था।

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