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जवाबदेही से परे काम करने वाले वरिष्ठ नौकरशाह... भारत का असली डीप स्टेट कौन? अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने किया बड़ा दावा

Surjit Bhalla On Deep State Bureaucracy: मनीकंट्रोल के साथ इंटरव्यू में सुरजीत भल्ला ने देश के नीतिगत फैसलों में वरिष्ठ नौकरशाहों के अत्यधिक प्रभाव को 'डीप स्टेट' करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत में वास्तविक और बड़े आर्थिक सुधार तभी हुए हैं, जब कमान आईएएस अधिकारियों के हाथ में नहीं थी

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jul 17, 2026 पर 4:38 PM
जवाबदेही से परे काम करने वाले वरिष्ठ नौकरशाह... भारत का असली डीप स्टेट कौन? अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने किया बड़ा दावा
IMF के पूर्व कार्यकारी निदेशक सुरजीत भल्ला ने भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है

Economist Surjit Bhalla: क्या भारत की तरक्की और बड़े आर्थिक सुधारों के आड़े यहां की नौकरशाही आ रही है? क्या भारत में भी कोई 'डीप स्टेट' काम कर रहा है जो पर्दे के पीछे से देश की नीतियां तय करता है? प्रख्यात अर्थशास्त्री और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पूर्व कार्यकारी निदेशक सुरजीत भल्ला ने भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है।

मनीकंट्रोल की श्वेता पुंज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में सुरजीत भल्ला ने देश के नीतिगत फैसलों में वरिष्ठ नौकरशाहों के अत्यधिक प्रभाव को 'डीप स्टेट' करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत में वास्तविक और बड़े आर्थिक सुधार तभी हुए हैं, जब कमान आईएएस अधिकारियों के हाथ में नहीं थी। आइए समझते हैं सुरजीत भल्ला के इस बड़े दावे के पीछे की पूरी कहानी।

1991 के सुधार: जब IAS अधिकारियों के हाथ में नहीं थी कमान

श्वेता पुंज के साथ बातचीत में सुरजीत भल्ला ने भारत के आर्थिक इतिहास का एक बेहद दिलचस्प उदाहरण सामने रखा। भल्ला ने कहा कि 1960 और 1970 के दशक से भारत एक ही ढर्रे पर चल रहा था। देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने वाले 1991 के ऐतिहासिक सुधार इकलौता ऐसा समय था, जब देश का 'डीप स्टेट' बेअसर साबित हुआ था।

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