पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के दो LPG टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। अमेरिका-इजरायल से युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से शिपिंग को लगभग रोक दिया है। बता दें कि, ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले को एक महीने का वक्त पूरा हो चुका है। वहीं बीते एक महीने से जारी इस जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने जानकारी दी कि बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम नाम के दो एलपीजी जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज से निकल चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन दोनों टैंकरों में कुल मिलाकर करीब 94,000 टन गैस भरी हुई है। इनमें से बीडब्ल्यू टीवाईआर मुंबई पहुंचने वाला है, जहां इसके 31 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं बीडब्ल्यू ईएलएम न्यू मैंगलोर की ओर जा रहा है, जिसके 1 अप्रैल तक पहुंचने की संभावना है। जहाज़ों की निगरानी करने वाली संस्था एलएसईजी के डेटा के अनुसार, चार टैंकर पहले ही इस रास्ते को पार कर चुके हैं, जबकि तीन और टैंकर अभी स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं।
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़रायल के बीच चल रहे तनाव के कारण शिपिंग पर असर पड़ा है। इसके बावजूद, तेहरान ने “गैर-दुश्मन जहाज़ों” को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन शर्त यह है कि वे ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर चलें।
भारत के झंडे वाले चार टैंकर पहले ही होर्मुज पार कर चुके
इससे पहले, भारत के झंडे वाले चार एलपीजी टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से सुरक्षित गुजर चुके थे। पाइन गैस और जग वसंत, जिनमें करीब 92,612 टन एलपीजी थी, 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच गए थे। इससे पहले एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी, जिनमें लगभग 92,712 टन गैस थी, क्रमशः 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह और 17 मार्च को कांडला बंदरगाह, गुजरात में पहुंच गए थे। भारत अपनी कुकिंग गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में इन जहाजों के पहुंचने से एलपीजी की संभावित कमी को कम करने में मदद मिलेगी। पिछले साल भारत में करीब 33.15 मिलियन टन एलपीजी की खपत हुई थी, जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत जरूरत आयात के जरिए पूरी की गई थी। इस आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद होने की स्थिति में आने के बाद, भारत अब अमेरिका और अर्जेंटीना जैसे देशों से एलपीजी मंगवा रहा है। सरकारी बयान के मुताबिक, भारत के झंडे वाले कुल 18 जहाज़, जिनमें 485 भारतीय नाविक सवार हैं, पश्चिमी फारसी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं। जब पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ था, उस समय होर्मुज़ जलडमरूमध्य में भारत के 28 जहाज़ मौजूद थे। इनमें से 24 जहाज़ पश्चिमी हिस्से में और 4 जहाज़ पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिनों में हालात थोड़े बेहतर हुए हैं। पश्चिमी हिस्से से 6 और पूर्वी हिस्से से 2 जहाज़ सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे हैं। इन 6 एलपीजी टैंकरों के अलावा, भारत का एक और तेल टैंकर जग लाडकी, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल भरा था, 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंच गया।