Skylight Tanker: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच एक और दुखद खबर सामने आई है। ओमान की खाड़ी में ईरानी मिसाइल हमले का शिकार हुए तेल टैंकर 'Skylight' पर लापता दो भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। इस हमले ने खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर डर और बढ़ा दिया है।
Skylight टैंकर पर हुए हमले में मारे गए दोनों भारतीयों की पहचान कर ली गई है। बिहार के रहने वाले आशीष इस जहाज के कैप्टन थे। उनकी अस्थियां जहाज के 'कैप्टन केबिन' से बरामद की गई हैं। परिवार को बुधवार देर रात ईमेल के जरिए उनकी मौत की सूचना मिली, जिससे पूरे घर में कोहराम मच गया है। वहीं दूसरे व्यक्ति राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले दलीप सिंह थे जो जहाज पर क्रू मेंबर के तौर पर तैनात थे। उन्होंने इसी साल 22 जनवरी को अपनी ड्यूटी जॉइन की थी।
पलाऊ के झंडे वाला यह टैंकर ओमान के 'खसाब पोर्ट' से महज 5 समुद्री मील की दूरी पर था, जब इसे निशाना बनाया गया। यह हमला ओमान के दुकम पोर्ट पर हुए ड्रोन हमलों के ठीक बाद हुआ। हमले के वक्त जहाज पर कुल 20 लोग सवार थे, जिनमें 15 भारतीय और 5 ईरानी नागरिक थे। ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र (MSC) ने बाकी चालक दल को सुरक्षित निकालने की पुष्टि की है। बता दें कि दिसंबर 2025 में ही अमेरिकी सरकार ने इस 'Skylight' टैंकर को अपनी प्रतिबंध सूची में डाला था।
'जो निकलेगा उसे जला देंगे', ईरान की सीधी धमकी
यह हमला ईरान की उस चेतावनी के बाद हुआ है जिसमें उसने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया था। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने कहा, 'होर्मुज का रास्ता बंद है। जो भी यहां से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे जलाकर खाक कर दिया जाएगा।' यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात मार्ग है, जो सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादकों को अरब सागर से जोड़ता है।
खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल) के लिए इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है। कैप्टन आशीष और दलीप सिंह की मौत के बाद अब सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह युद्ध क्षेत्र में फंसे अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए कोई बड़ा ठोस कदम उठाए।