Seyed Abbas Araghchi: ईरान-इजरायल युद्ध का दायरा अब खाड़ी क्षेत्र से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गया है। बीते दिन एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी नौसेना के युद्धपोत 'IRIS Dena' को टारपीडो से डुबो दिया। इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को इस गलती की भारी कीमत चुकानी होगी।
ईरान के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया 'X' पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना का मेहमान था और इसे बिना किसी चेतावनी के निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि अमेरिका को इसका 'कड़वा पछतावा' होगा।
बिना चेतावनी के किया टारपीडो हमला
यह घटना 4 मार्च की सुबह श्रीलंका के गाले तट से करीब 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। तड़के करीब 5:00 बजे 'IRIS देना' पर एक शक्तिशाली टारपीडो से हमला किया गया। जहाज से मिले 'डिस्ट्रैस सिग्नल' के मुताबिक, पानी के नीचे एक जोरदार धमाका हुआ, जिससे जहाज का ढांचा टूट गया और वह कुछ ही मिनटों में डूब गया। श्रीलंका की नौसेना ने सूचना मिलते ही बचाव कार्य शुरू किया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, अब तक 87 शव बरामद किए जा चुके हैं। करीब 32 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जिनमें जहाज के कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जहाज पर सवार कुल 180 लोगों में से अभी भी करीब 60 नाविक लापता बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पुष्टि की है कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबोया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र से सैकड़ों मील दूर हिंद महासागर में हुआ यह हमला एक 'खतरनाक स्पिलओवर' यानी युद्ध के बड़े स्तर पर फैलने का संकेत है।
भारतीय नौसेना का 'मेहमान' था यह जहाज
इस घटना ने भारत के लिए भी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह जहाज भारत के साथ एक महत्वपूर्ण मिशन का हिस्सा था। 'IRIS देना' हाल ही में विशाखापत्तनम में आयोजित भारत के बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास 'MILAN 2026' में शामिल होकर लौट रहा था। भारतीय नौसेना ने इस जहाज का गर्मजोशी से स्वागत किया था और इसे भारत-ईरान के पुराने सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया था।