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मुबंई में फिर शुरू हुई रिसॉर्ट पॉलिटिक्स! उद्धव ठाकरे के 11 कॉर्पोरेटर अनरीचेबल...पार्टी ने उठाया ये बड़ा कदम

बताया जा रहा है कि इस इलाके से उद्धव ठाकरे गुट के 11 कॉर्पोरेटर अचानक संपर्क से बाहर यानी अनरीचेबल हो गए हैं। इससे राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है और कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिंदे गुट और MNS के बीच हाथ मिलाने की पूरी संभावना बनी हुई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 19, 2026 पर 4:58 PM
मुबंई में फिर शुरू हुई रिसॉर्ट पॉलिटिक्स! उद्धव ठाकरे के 11 कॉर्पोरेटर अनरीचेबल...पार्टी ने उठाया ये बड़ा कदम
नगर निकाय चुनाव के बाद एक बार फिर वहां रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव के बाद एक बार फिर वहां रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मेयर को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। इसी बीच पास के कल्याण डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में जबरदस्त राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। KDMC में चल रहा यह ड्रामा कुछ हद तक गुवाहाटी की उस घटना की याद दिलाता है, जिसके बाद एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को तोड़ दिया था।

बताया जा रहा है कि इस इलाके से उद्धव ठाकरे गुट के 11 कॉर्पोरेटर अचानक संपर्क से बाहर यानी अनरीचेबल हो गए हैं। इससे राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है और कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

आंकड़ों का खेल

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के चुनाव में शिंदे सेना को 122 में से 53 सीटें मिली हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की है। KDMC में सरकार बनाने के लिए 62 सीटों का बहुमत जरूरी है। हालांकि राज्य स्तर पर शिंदे गुट और BJP एक साथ गठबंधन में हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि कल्याण-डोंबिवली में दोनों ही दल अकेले दम पर सत्ता हासिल करना चाहते हैं। यह इलाका एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है, इसलिए यहां मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

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