Delhi Riots Case: दिल्ली दंगा मामले में जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद उमर खालिद ने कहा कि अब जेल ही उसकी जिंदगी है। उमर की दोस्त बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोमवार (5 जनवरी) को यह जानकारी दी। हालांकि, बनोज्योत्सना ने बताया कि उमर मामले के अन्य आरोपियों को जमानत मिलने से खुश है। शीर्ष अदालत ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी सोमवार (5 जनवरी) को ठुकरा दी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि उमर और शरजील के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। हालांकि, पीठ ने मामले के अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।
बनोज्योत्सना ने X पर एक पोस्ट में कहा, "उमर ने कहा, 'मैं बाकी लोगों के लिए बहुत खुश हूं, जिन्हें जमानत मिल गई! राहत महसूस हो रही है।'" जवाब में मैंने कहा, "मैं कल मुलाकात के लिए आऊंगी।" उमर ने कहा, "हां, आ जाना। अब यही जिंदगी है।"
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि मुकदमे में देरी कोई तुरुप का इक्का नहीं है, जो वैधानिक सुरक्षा उपायों को खुद ही दरकिनार कर दे।
दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि दंगे एक सुनियोजित साजिश का नतीजा थे। उन्होंने कहा, "दिल्ली की जनता के खिलाफ जानबूझकर साजिश रची गई थी। आज के फैसले ने एक बार फिर इसे साबित कर दिया है।"
सूद ने कहा, "सरकार का विरोध करना गलत नहीं है, लेकिन देश का विरोध करना अलग बात है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग देश के खिलाफ काम करने के आरोपियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं।" दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दंगाइयों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कड़ा संदेश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त किया।
उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता (आईपीसी) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।